श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)
Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary
गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा
DevanagariHindipublished195 पृष्ठ
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३४) (श्री भक्तमाल चलो आगे देखौ कोऊ रहै न परेखौ भाव, भक्ति करि लेखौ गये द्वीप हरि गाइये। आयो एकजन धाय आरती समय विहाय, खैचि लिये प्रान फिरि बधू याकी आइये।। वही इन कही पति देख्यो नहीं मही पर्यो, हर्यो याको जीव तन गिर्यो मन भाइये। ऐसे पुत्र आदि आये साँचे हित में दिखाये, फेरिकै जिवाये ऋषि गाये चित लाइये।।१०५।। अष्टकुल नाग भक्त उरग अष्टकुल द्वारपाल, सावधान हरिधाम थिति।। इलापत्र मुख अनन्त, अनन्त कीरति बिसतारत। पद्म शंकु पन प्रकट, ध्यान उर ते नहिं टारत।। अश्वकमल वासुकी, अजित आज्ञा अनुवरती। करकोटक तक्षक सुभट सेवा सिर धरती।। आगमोक्त शिवसंहिता "अगर" एकरस भजन रति। उरग अष्टकुल द्वारपाल सावधान हरिधाम थिति।। २७।। ।। इति पूर्वार्ध।।