श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)
Shri Guru Gita from Skanda Purana with Hindi Commentary
भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास / डॉ. मोतीलाल खद्दर शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्षमापन स्तोत्र का हिन्दी अनुवाद हे, माँ! मैं न मन्त्र जानता हूँ, न यन्त्र, अहो! मुझे स्तुतिका भी ज्ञान नहीं है। न आवाहन का पता है, न ध्यानका। स्तोत्र और कथा की भी जानकारी नहीं है। न तो तुम्हारी मुद्राएँ जानता हूँ और न मुझे व्याकुल होकर विलाप करना ही आता है, परंतु एक बात जानता हूँ, केवल तुम्हारा अनुसरण-तुम्हारे पीछे चलना। जो कि सब क्लेशों को-समस्त दुःख विपत्तियों को हर लेनेवाला है ॥१॥ सबका उद्धार करने वाली कल्याणमयी माता। मैं पूजाकी विधि नहीं जानता, मेरे पास धनका भी अभाव है, मैं स्वभाव से भी आलसी हूँ तथा मुझसे ठीक-ठीक पूजा का सम्पादन हो भी नहीं सकता, इन सब कारणों से तुम्हारे चरणों की सेवा में त्रुटि हो गयी हो, उसे क्षमा करना। क्योंकि कुपुत्र का होना सम्भव है, किंतु कहीं भी कुमाता नहीं होती॥२॥ माँ! इस पृथ्वीपर तुम्हारे सीधे-सादे पुत्र तो बहुत से हैं, किंतु उन सबमें मैं ही अत्यन्त चपल तुम्हारा बालक हूँ, मेरे-जैसा चंचल कोई विरला ही होगा। शिवो मेरा जो यह त्याग हुआ है, यह तुम्हारे लिये कदापि उचित नहीं है, क्योंकि संसार में कुपुत्र का होना सम्भव है, किंतु कहीं भी कुमाता नहीं होती॥३॥ जगदम्बा ! मात: ! मैंने तुम्हारे चरणों की सेवा कभी नहीं की देवि। तुम्हें अधिक धन भी समर्पित नहीं किया, तथापि मुझ-जैसे अधारण को तुम अनुपम स्नेह करती हो, इसका कारण यही है कि संसार में कुपुत्र पैदा हो सकता है किन्तु कहीं भी कुमाता नहीं होती ॥४॥ ( 65 )