भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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श्री राम – “मैं प्रतिदिन इन्हें देखता हूँ अयोध्या में, ब्रह्ममूर्त में निकलता हूँ, सैनिकों के घर भी जाता हूँ, सेना प्रमुख के यहाँ भी जाकर बैठता हूँ, उनसे जो सवाद होता है तो उनसे मुझे समझ आता है, कि ये पैसे के लिए लड़ने वाले हैं, इनकी ताकत नहीं है, इसलिए मैं तो ऐसे सैनिक तैयार करूँगा जो अपने सम्मान व इज्जत के लिए लड़ेंगे, अपने अस्तित्व के लिए लड़ेंगे, उनकी ताकत इनसे कई गुनी ज्यादा होगी”।

विश्वामित्र – “ थोड़ा और स्पष्ट करो”

श्री राम – “देखो जंगल में कई लोग रहते हैं,

विश्वामित्र – “कौन लोग रहते हैं?

तो विश्वामित्र भारत के उन जनजातियों के नाम गिना रहे हैं, जो जंगलों में निवास करती हैं जैसे – गौड़, भील, कोल आदि जनजाति, ऐसी 4556 जनजाति है जो शहरों में नहीं रहती, नगरों में नहीं रहती, आज हम उन्हें दुर्भाग्य से आदिवासी कहते हैं, राम उन्हें वनजाति के रूप में सम्बोधित करते हैं,

श्री राम – “ये जो 4556 किस्म की जनजातियाँ हैं, इनका राक्षसों से क्या लेना-देना है?”

विश्वामित्र समझा रहे हैं कि “राक्षस इन्हीं को परेशान करते हैं इनके घर लूट लेते हैं, इनकी सम्पत्ति लूट लेते हैं, इनके घर की बेटियों को ले जाते हैं, इनकी पत्नियों का शील हरण कर लेते हैं, उनका सम्मान खत्म कर देते हैं, और घरों में आग लगा देते हैं, इनके घरों से पकड़े हुए लोगों को कहीं दास बनाकर बेच देते हैं, राक्षस इस किस्म के लोग हैं”, तो राम कहते हैं, “बस मेरा समाधान हो गया” तो विश्वामित्र पूछते हैं “क्या” तो राम कहते हैं कि “मैं इन्हीं के बीच जाऊँगा, चूँकि राक्षस इनको परेशान कर रहे हैं, चूँकि ये राक्षसों से पीड़ित हैं, चूँकि राक्षसों से बहुत साल से शोषित हैं, इसलिए इनके मन में थोड़ी सी चिंगारी सुलगाऊँगा, ये बहुत बड़े सैनिक बन जायेंगे”, तो विश्वामित्र कहते हैं कि “राम ये तो सब साधारण लोग हैं”, इन जनजाति में कुछ जनजाति ऐसी हैं जो लोहे के औजार बनाती हैं”, राम ने कहाँ तब तो बहुत अच्छा है, जो लुहारी जानते हैं, वो अस्त्र-शस्त्र भी बना सकते हैं, जिनको कच्चा माल पीटना आता है, वो शस्त्रों व अस्त्रों का निर्माण कर लेंगे, अब बताओ दूसरे कौन हैं?”

विश्वामित्र – “दूसरी वो जनजातियाँ हैं जो कुम्हारी का काम करती हैं, तीसरी जनजातियाँ बैलगाड़ी बनाने का काम करती हैं, चौथी जनजातियाँ बाँस का काम करती हैं”

श्री राम – “ये जितनी तरह की जनजातियाँ हैं, चूँकि सब कुछ न कुछ काम करते हैं, इसलिए मेरी सेना इन्हीं से बनेगी।”

विश्वामित्र - “अब ये सेना युद्ध कैसे करेगी ?”

श्री राम - “ये सेना हर समय युद्ध नहीं करेगी, ये हर समय अपना काम करेगी, जब युद्ध का समय आयेगा, तो काम छोड़कर, युद्ध के मैदान में लड़ेंगे”

विश्वामित्र – “फिर तो इन्हें विशेष प्रशिक्षण देना पड़ेगा”

श्री राम – “उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, इनको विशेष प्रशिक्षण देना है, इसकी जिम्मेदारी मेरी है।