भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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तो इस तरह का संवाद करते-करते सीमा समाप्त होती है, और विश्वामित्र के स्थान पर आकर टिकते हैं, आते ही मुठभेड होना शुरू हो जाती है, और वे वध करना शुरू कर देते हैं, आप जानते हैं, जो सबसे बड़ी राक्षसी का वध किया वो ताड़का है, और उस ताड़का का वध करने में सब समझ में आ जाता है, कि राक्षसों की राज्य व्यवस्था कैसी है, इनकी नीतियाँ कैसी हैं? न्याय कैसे हैं, कानून कैसे है? तो राम और लक्ष्मण एक दूसरे से संवाद करते हैं, तो हम कुछ भी करेंगे, इन राक्षसों का सफाया करेंगे, क्योंकि ये धर्म के विरुद्ध हैं, न्याय के विरुद्ध हैं, तो लक्ष्मण जी पूछते हैं “भइया ये न्याय क्या होता है, अन्याय क्या होता है?”

श्री राम – “जब कोई अपने स्वार्थ को छोड़कर परमार्थ के लिए लड़ता है, दूसरों की इज्जत के लिए लड़ता है, दूसरों का सम्मान बढ़ाने के लिए लड़ता है, दूसरों की रोजी-रोटी बचाने के लिए लड़ता है, वो सबसे बड़ा न्यायी है, और जो दूसरों की परवाह ही नहीं करता, और अपने ही स्वार्थ में डूबा रहता है, उससे ज्यादा अन्यायी दूसरा कोई नहीं है।”

आज के समय में ये परिभाषा बिल्कुल सटीक बैठती है। आज कलयुग आ गया है, राम जी का युग चला गया है, 5 लाख 23 साल से कुछ ज्यादा समय बीत गया है, आज भी यही दिखाई दे रहा है इस समाज में जो अपना स्वार्थ छोड़कर समाज के लिए, समाजिक लोगों के लिए काम करें वहीं महात्मा गाँधी होता है, वही लोकमान्य तिलक होता है, वहीं उधम सिंह, भगत सिंह होता है, और उन्हीं के सामने हम अपना सिर झुकाते हैं, और जो सबकुछ परमार्थ को छोड़कर स्वार्थ में डूबा रहता है, वो भले ही हजार करोड़ की सम्पत्ति का मालिक हो, समाज उसको भूल जाता है, 10 दिन भी याद नहीं करता है, हजार करोड़ की सम्पत्ति के मालिक का स्वर्गवास होता है, मैं पिछले बीस साल से देख रहा हूँ, 10 दिन के बाद 11वें दिन कोई याद नहीं करता, फिर याद कराने के लिए अखबारों में, मीडिया में कुछ करोड़ रुपये के विज्ञापन देने पड़ते है, कि हमारे सेठ जी का स्वर्गवास हुआ था, हम उन्हें याद कर रहे हैं, मानो करोड़ों रुपये का विज्ञापन खर्च कर रहे हैं, समाज उनको याद नहीं करता है, महात्मा गाँधी को याद करने के लिए कोई विज्ञापन नहीं देना पड़ता है, भगत सिंह को याद करने के लिए कोई विज्ञापन नहीं, उधम सिंह को याद करने के लिए कोई विज्ञापन नहीं लगता, तो राम जी बनाकर गये हैं ये परिभाषा, हमारी नहीं है कि जो दूसरों के लिए लड़ रहा है, उनके संधर्ष में है, तो वो तो न्याय के रास्ते पर है, जो स्वार्थ पर है वो अन्याय के रास्ते पर है।

तो बात चल रही है, कि ये जो रावण हैं वो किस रास्ते पर हैं, तो राम कह रहे हैं निश्चित रूप से अन्याय के रास्ते पर, रावण अपने लिए लड़ रहा है, अपनी जाति के लिए लड़ रहा है, इसके आगे कुछ नहीं, तो वो तो अन्याय के रास्ते पर है, राक्षस सब अन्याय के रास्ते पर है, हम सब न्याय के रास्ते पर इसलिए हैं, क्योंकि हम स्वार्थ को छोड़कर अयोध्या से यहाँ आये हैं, और यहाँ आने के बाद हम जीतेंगे इस युद्ध को, ये मेरा विश्वास है, लेकिन अपना राज्य कायम नहीं करेंगे, ये पूरा राज्य इन्हीं को सौंपकर चुपचाप यहाँ से निकल जायेंगे।