श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मण – “अरे मैं तो ये सोचकर बैठा था कि ये किशकिन्धा का पूरा राज्य हमारा होने वाला है”
किशकिन्धा एक बहुत बड़ा वन का क्षेत्र है जिसका राजा बहुत दिन तक बालि रहा है, बाद में सुग्रीव रहा है, और बालि के पहले रावण वहाँ का राजा हैं,
लक्ष्मण – “मैं तो सोच रहा था कि इसे जीतकर ये हमारे अयोध्या का अंग बनेगा”
श्री राम – “लक्ष्मण क्या तुम भी अन्याय के रास्ते पर जाना चाहते हो?”
लक्ष्मण – “हमारे भारत में तो चक्रवती सम्राट वही होता है, जो दूसरों के राज्य को जीत लेता है” ।
श्री राम – “मैं चक्रवतित्व की परिभाषा बदलना चाहता हूँ, और एक नई परिभाषा गढ़ना चाहता हूँ”
अब देखिये इस बात को, श्री राम से पहले जितने भी राजा हुए, रघु हुए, दिलीप हुए इन सबने चक्रवतित्व की परिभाषा इस प्रकार बनाई है, कि किसी राज्य के लिए वो लड़े, जीत लिया, तो राज्य उनके अधीन आया, और इस तरह से रघु चक्रवती हुए, अज चक्रवती हुए, दीलीप चक्रवती हुए, ये सब दशरथ के पूर्वज हैं, दशरथ के पिता, पितामह सब हैं, तो राम कहते हैं कि मैं अपने कुल में चक्रवतित्व की परिभाषा बदलना चाहता हूँ, और आज से नई परिभाषा गढ़ना चाहता हूँ, कि हम राज्य को जीतेंगे, लेकिन अपने राज्य का अंग नहीं बनायेंगे, इसी राज्य में से किसी को निकालकर, उसको राजा बनाकर हम वापस अपने घर चले जायेंगे ।
लक्ष्मण – “भैया इनमें हैसियत नहीं है राजा बनने की”
श्री राम – “तो हम हैसियत पैदा करेंगे, ये तो ठीक है, कि इनमें हैसियत नहीं है, लेकिन हम हैसियत पैदा करेंगे, इनको ट्रेनिंग देंगे, विचार का प्रशिक्षण, अस्त-शस्त्र का प्रशिक्षण, राज्य नीति का प्रशिक्षण । ये सब देंगे तो राज्य चलाने के लिए भी पर्याप्त हो जायेंगे” ।
लक्ष्मण “तो ये कौन-सा तंत्र बनेगा?”
श्री राम – “यह गणतंत्र बनेगा, यही प्रजातंत्र बनेगा”
मुझे समझ आता है कि प्रजातंत्र के मूल श्री राम ही हैं, उनके पहले इस देश प्रजातंत्र कही नहीं है, प्रजातंत्र में आज जो परिभाषा चलती है न, लोगो का शासन, लोगो के लिए, लोगो के द्वारा । श्री राम जी ने तो यही सिद्ध कर दिया, वन में गये हैं, और छोटे छोटे राज्य जो राक्षसों के कब्जे में हैं, उनको मुक्त कराया है, संहार किया है, रावण के सहयोगी राक्षसों का, और अच्छे तरह से किया है, जड़-मूल को खत्म कर दिया है, लेकिन किसी भी राज्य को अयोध्या में नहीं मिलाया है, हर स्थानीय के किसी एक व्यक्ति को राजा बना दिया है, तो गौड जाति का राज्य स्थापित करा दिया, भीलों का राज्य स्थापित करा दिया, कोलो का