श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराज्य स्थापित करा दिया, और वो राज्य हजारों साल तक इस देश में चलता आया, अगर आप गौंड जनजाति या भील जनजाति, या कोल जनजाति के लोगों के बीच में जाकर संवाद करे तो कहते हैं, कि ये राज्य को राम का दिया हुआ है, मैं पिछले 4-5 वर्षों में मध्य और दक्षिण भारत में रहने वाली जो जनजातियां हैं, गौंड जनजाति सबसे ज्यादा मध्य भारत में हैं, यो जो मध्य प्रदेश का हिस्सा हैं, थोड़ा महाराष्ट्र का, और बहुत बड़ा आन्ध्र प्रदेश का, यहाँ पर गौंड जनजातियों के लोग रहते हैं, कोल जनजाति थोड़ा उससे नीचे है, और भील काफी बड़े इलाके में हैं, इन तीनों जनजातियों के बीच में जाकर कई दिन रहा हूँ और उनकी रामकथा सुनी हैं, वो हर बार रामकथा की शुरुआत में कहते हैं, कि हे श्री राम ये राज्य आपका दिया हुआ है, हम तो आपके सेवक हैं, जब कम्ब रामायण मैने पढ़ा तो बिल्कुल बात समझ में आयी, वो लक्ष्मण को कह रहे हैं कि राज्य हम जीतेगे, देगे इनको वापस, राजा इन्हीं का होगा, हमारा कोई व्यक्ति राजा बनकर नहीं बैठेगा, तो राक्षसों से राज्य छीन कर भीलों को, कोलों को, और दूसरी जनजातियों को राजा बनाते हुए चले जाना, ये राम ने चक्रवर्तित्व की नई परिभाषा दी हैं, और इसलिए वे आदर्श और मर्यादा पुरुषोत्तम माने गये हैं। हमारे यहाँ इसके पहले ऐसा कभी हुआ नहीं, श्री राम जी के पहले का इतिहास जो भी पढ़ा गया या जिसको भी थोड़ी समझ है वो ये हैं जिस भी राजा ने दूसरे को जीत लिया, अपने राज्य में उसे मिला लिया, लेकिन श्री राम कहते हैं कि जीता और उसी में से राजा बनाया, फिर ये कहानी का हिस्सा पूरा होता है। भगवान श्री राम अच्छे से विश्वामित्र जी का यज्ञ करवा वापस लौटने की तैयारी करते हैं तो विश्वामित्र कहते हैं, देखो ईश्वर की एक इच्छा और हैं अभी, एक तो ही गयी, वन में यज्ञ सम्पन्न हो गया, वन के जो मालिक हैं, उनको उनका राज्य मिल गया, अभी दूसरी इच्छा बाकी है।
श्री राम – “वो क्या?”
विश्वामित्र – “तुम्हारा विवाह, वो भी ईश्वर की इच्छा से ही निश्चित हैं”
श्री राम – “आपने कहाँ देखा हैं मेरे विवाह के लिए”
विश्वामित्र – “मैने देखा हैं, और तय भी कर लिया, विवाह तुम्हारा वही होना हैं”
फिर राजा जनक की कहानी वे श्री राम को सुनाते हैं, कि एक राजा जनक हैं, उनकी एक पुत्री है जिसको उन्होंने उत्पन्न तो नहीं किया है, लेकिन उसको पुत्री की तरह से पाला है”
श्री राम - “उन्होंने उत्पन्न नहीं किया, माने उनकी कुल की नहीं हैं, तो कहाँ से मिली”
विश्वामित्र – “खेत में मिली है, तो उसके कुल का पता नहीं हैं, और तुम्हारा विवाह वहीं होना है”
श्री राम – “आपने पिताजी से पूछा है? ”
विश्वामित्र – “पूछे या न पूछे ये तो हरि की इच्छा हैं, होना तो वहीं है”
श्री राम – “क्या ईश्वर मुझसे दूसरा ऐसा भी कार्य कराना चाहता है?”