श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविश्वामित्र – “जिस कन्या के परिवार का कुछ पता नहीं, कुल का कुछ पता नहीं, जब तुम उससे विवाह करोगे, और तब उसको जो प्रतिष्ठा मिलेगी तो एक दूसरी मर्यादा बनेगी”
श्री राम – “तो ठीक है, आपको ऐसा ही लगता है, कि इसमें कोई मर्यादा बन रही है मैं तैयार हूँ”
लक्ष्मण – “सोच लो भईया, दूसरा मौका नहीं मिलेगा”
विश्वामित्र – “क्यों नहीं मिलेगा? तुम्हारे पिताजी ने तो तीन-तीन शादियाँ की हैं, तुम चाहो तो दूसरी कर लेना”
श्री राम – “हाँ, लेकिन पिता जी से वो गलती हुई है”
विश्वामित्र – “तुम मानते हो की वो गलती हुई है? तो कौशल्य ही तुम्हारी माँ नहीं है, कैकयी भी है, सुमित्रा भी है, और तुम ये भी मानते हो की तुम्हारे पिता ने तीन शादियाँ करके गलती की है, तो फिर ये कैसे हैं?”
श्री राम – “पिता जी ने शादियाँ कर ली हैं तो मैंने उनको माँ मान लिया है लेकिन मेरा मन कहता है कि पिता ने ये गलती की है”
विश्वामित्र – “तुम्हारे पिता ने कोई गलती नहीं की है, तुम्हारे जो दादा-परदादा थे उन्होंने ने भी यही किया है और राम का जो वंश है जिसको रघु वंश कहते हैं, रघु वंश के सभी राजाओं ने एक से ज्यादा शादियाँ कि हैं”
श्री राम – “गुरुदेव मैं आपके सामने संकल्प करता हूँ कि मैं दूसरी मर्यादा एक पत्नीव्रत की सिद्ध करके रहूँगा”
विश्वामित्र – “कैसे?”
श्री राम – “मैंने अपने महल में देखा है, कौशल्य दशरथ की पहली पत्नी है, जैसे ही दूसरी आयी, तो दशरथ के अन्दर कौशल्य के प्रति उपेक्षा भाव आया, तीसरी आयी तब कौशल्य व सुमित्रा के प्रति उपेक्षा भाव आया और कैकयी के प्रति समर्पण भाव आया, और उसी समर्पण भाव का परिणाम है कि हमारे महल में बहुत कुछ ऐसा हुआ जो होने लायक नहीं है”
विश्वामित्र – “राम तुम समय से पहले परिपक्व हो चुके हो”
श्री राम – “मैं परिपक्व हुआ हूँ, ये तो मैं नहीं जानता, लेकिन ईश्वर मुझसे बहुत कुछ कहलवाता है, मुझे कई बार मालूम नहीं होता मैं क्या कह रहा हूँ”
लक्ष्मण – “यदि श्री राम एक पत्नी व्रत का संकल्प लेते हैं तो मैं आजीवन इनके चरणों की वंदना करूँगा, और मैं ये कहूँगा जोर-जोर कर कि मेरे भाई के चरण मेरे पिता के चरण से ज्यादा पवित्र है”
श्री राम – “देख दशरथ पिता हैं” (डाटेंते हुए)