भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 32 में से

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लक्ष्मण – “भले ही वो मेरे पिता हैं, लेकिन चरित्र में उतने ऊँचे नहीं हैं, जितने आप हैं, कोई कितना भी महान राजा हो, कितना भी महान सेनापति हो, कोई कितना भी महान करोड़पति हो, कोई कितना भी महान विद्वान हो, यदि उसका चरित्र नहीं है, तो वो कुछ भी नहीं हैं, भारत की भारतीयता तो चरित्र पर जाती है, बाकि सब चीजें गूढ़ हो जाती हैं, यदि आप एक पत्नी व्रत का संकल्प ले रहे हैं, तो आप चरित्र की किसी ऊँचाई की स्थापना करने जा रहे हैं, इसलिए आज से मैं आपके चरणों की वन्दना करने का संकल्प लेता हूँ”

श्री राम – “विश्वामित्र गुरुदेव आप पिताजी को संदेश भेज दीजिए, आप जहाँ कहे, मैं विवाह करने के लिए तैयार हूँ”

विश्वामित्र – “एक बार देख तो लो सीता को”

श्री राम - “देखना क्या हैं, तय हो गया है, कि वो बिना किसी कुल की हैं, उसका कोई खानदान नहीं है, उसके पिता का पता नहीं, माता का पता नहीं, जनक ने उसको पाला है, लेकिन उसके असली माता-पिता का पता नहीं है, मेरी भार्या बनेगी तो उसकी सब स्थिति स्पष्ट हो जायेगी, मैं मानता हूँ कि समाज के लिए कोई आदर्श ही बनेगा”

विश्वामित्र – “यदि तुम्हारे पिता को यह सूचना मिलेगी, तो विवाह नहीं होने देगे, क्योंकि जनक से उनकी पुरानी दुश्मनी है, कई पीढ़ियों की है”

श्री राम – “तब तो ओर भी अच्छा हैं, ये दुश्मनी का अध्याय ही खत्म हो जायेगा, दोस्ती शुरू हो जायेगी”

विश्वामित्र – “तुम्हें क्यों लगता है कि दुश्मनी खत्म हो जानी चाहिए?”

श्री राम – “क्योंकि रावण का संहार करना है, तो राजा जनक भी चाहिए, दशरथ भी चाहिए, बाकि सब चाहिए, और रावण का अकेला का संहार नहीं करना है, उसकी प्रशासनिक व्यवस्था, उसकी राजनीतिक व्यवस्था का संहार करना है, क्योंकि वो स्वार्थ आधारित हैं, हमें परमार्थ आधारित राजनीति स्थापित करनी है”

विश्वामित्र – “चलो भाई, जैसी तुम्हारी इच्छा, तुम्हारे पिता को बिना बताये चलते हैं, और पहुँच जाते हैं, राजा जनक के दरबार में”

राजा जनक – “मेरी पुत्री का विवाह मैं तय नहीं करूँगा, मेरी पुत्र तय करेगी, क्योंकि वो स्वयंबरा हैं, अपने वर को स्वयं चुनेगी, उसमें बहुत सारे सतगुण हैं, और उन्हीं सतगुणों के आधार पर मैं कहता हूँ वो स्वयंबरा हैं”

विश्वामित्र – “ठीक हैं, आप तय कर लो, अपनी पुत्री से पूछ लो”

तो जो धनुष की कहानी हैं, वो कम्ब रामायण में सीता जी की कहानी हैं, सीता जी ने कहाँ – “ठीक हैं ये जो बड़ा धनुष रखा है, जो तोड़ दे, मैं तय कर लूँगी”

तो बड़े-बड़े राजा-महाराजा आये हैं, कोई तोड़ नहीं पाया, और राम जी ने जाकर उसको तोड़ दिया है तो सीता जी ने उनको अपना पति मान लिया है तो अब वो सीता जी को लेकर

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