भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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हां जी करते घूमते हैं, ऐसे लोगों को मंत्री बनाते हो या जो तुम्हारे गलत को गलत कहे सही को सही कहे और तुम्हें सही सलाह दे ऐसे लोगों को मंत्री बनाते हो? तो भरत कहते हैं “हां मैं कोशिश तो करता हूँ बिना चापलूसी करने वालों को मंत्री बनाता हूँ।”

फिर वह आगे पूछ रहे हैं कि “तुम्हारे राज्य में भ्रष्टाचार कितना है”?

तब भरत कह रहे हैं “मेरे राज्य का कुल खर्चा का 1% या उससे कम भ्रष्टाचार है”।

तो राम कहते हैं कि “3% से ऊपर नहीं जाना चाहिए अगर गया तो राज्य व्यवस्था पूरी बदलनी पड़ेगी करप्शन है, लेकिन 3% के ऊपर नहीं।” आज हमारे देश में कुल खर्च का 70% करप्शन है, आज की तारीख में।

फिर राम जी पूछ रहे हैं कि “तुम तुम्हारे राज्य में जो लोग चोरी करते हैं अपराध करते हैं, बेईमानी करते हैं, उनको दण्ड देते हो या नहीं?

तो भरत कहते हैं “दण्ड तो देता हूँ, लेकिन जेल में देता हूँ”।

तो राम जी कह रहे हैं, “दण्ड जेल में नहीं खुले में मिलना चाहिए, मुकदमा जेल में चलना चाहिए”। वह कह रहे हैं जिसको भी दण्ड दो खुले में दो, ताकि प्रजा को मालूम हो कि इस बेईमानी का, इस चोरी का यह दंड है, मुकदमा जेल में चलाओ।”

अभी यहां क्या होता है? दण्ड जेल में होता है, मुकदमा खुले में चलता है। माने रामराज्य का बिल्कुल उल्टा, रावण राज्य का इंसाफ।

राम पूछ रहे हैं कि “तुम प्रजा से सुझाव मांगते हो, अपने बारे में या अपने राज्य के बारे में? तो प्रजा क्या कहती है”?

भरत कहते हैं कि “नियमित रूप से सुझाव लेता हूँ”

राम कहते हैं तो “ठीक है! तो फिर वह पूछ रहे हैं तुम तुम्हारे मंत्रियों का ज्यादा समय प्रमाद में मनोरंजन में, या मौज मस्ती में, तो नहीं बीतता”

भरत कह रहे हैं कि “नहीं! मेरे सब मंत्री मेहनत से काम करते हैं, कोई मनोरंजन नहीं करता, कोई मौज मजा नहीं लेता”,

राम जी ने कहा “यह आपके लिए नहीं है, यह प्रजा के लिए है, राजा को नहीं करना”।

फिर वह आज हमारे यहां क्या होता है? प्रधानमंत्री महीने-महीने भर की छुट्टी पर चले गए यूरोप के यात्रा पर चले गए, राष्ट्रपति चले गए, मुख्यमंत्री चले गए, राज्यपाल चले गए।

राम जी बोल कर गए कि राजा को नहीं करना यह काम प्रजा करें तो ठीक, राजा तो कर ही नहीं सकता, सोच भी नहीं सकता,

फिर वह आगे प्रश्न पूछ रहे हैं कि “क्या तुम्हारी सेना तुम्हारे पूरे अधिकार में है? क्या तुम्हारी सेना तुम्हारे सभी आदेशों को मानती है? क्या सेना में तुम्हारे यहां कोई विद्रोह तो नहीं है?

तो भरत कहते हैं “नहीं है!”

श्री राम कहते हैं, “फिर तुम निश्चित हो सकते हो”।

फिर श्री राम कहते हैं की “सेना में जो सैनिक वीरता दिखाते हैं उनको तुम पुरस्कृत करते हो या नहीं”?