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श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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तो भरत कह रहे हैं कि “नहीं! मेरे राज्य के मंत्रिमंडल में तो नहीं”।

तो राम कहते हैं कि “ध्यान रखना अगर मंत्रिमंडल के अंदर की बात बाहर गई तो राज्य चल नहीं पायेगा”।

जब हमारे हिंदुस्तान में कैबिनेट की मीटिंग चल रही होती है तो अंदर से कोई आ जाता है और न्यूज़ पेपर वालों को खबर देकर चला जाता है। एकदम से खबर अगले दिन हेड लाइन में आ जाती है, सब एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं की खबर कहाँ से ली हुई? हमें तो नहीं मालूम।

तो राम कहते हैं कि “अंदर के कोई फैसले बाहर लीक होते हैं तो ऐसे मंत्रियों को रखना नहीं तुरंत निकाल कर बाहर कर देना” फिर आगे वह पूछते हैं कि “तुम कभी भी कोई योजना बनाते हो तो धन की व्यवस्था कैसे करते हो? क्या प्रजा के ऊपर टैक्स लगाते हो नहीं? कर लगाते हो या अपने राज्य का फालतू खर्च कम करके उससे योजना बनाते हो?” तो भरत कह रहे हैं कि “मैं कोशिश करता हूँ कि मेरे राज्य के फालतू खर्च कम करके और इसी से प्रजा की भलाई के काम करूँ, नए टैक्स लगाने में मुझे विश्वास नहीं है, क्योंकि आप मानते हो ज्यादा टैक्स अच्छे नहीं है”।

आजादी के समय में सरकार 12-13 तरह के टैक्स लेती थी, अब आजादी के 60 साल बाद 63 टैक्स हो चुके हैं और फिर भी वित्त मंत्री का पेट नहीं भरता, हर समय कहते हैं और टैक्स लाओ और टैक्स लाओ, हर दिन उनका स्टेटमेंट होता है, ज्यादा से ज्यादा लोगों को इनकम टैक्स में फंसा दो, 7.5 लाख करोड़ रुपए हम हर साल टैक्स में भरते हैं, फिर भी सरकार का पेट नहीं भरता।

राम जी कहते हैं कि “फालतू खर्च कम करो उससे प्रजा का विकास करो।”

आज की सरकार के 90% खर्च फालतू है, यह सरकार खुद कहती है। फालतू खर्च माने प्रधानमंत्री की पगार, प्रधानमंत्री का वेतन, प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडल का वेतन, राष्ट्रपति का वेतन, मुख्यमंत्रियों का वेतन, राज्यपालों का वेतन, सरकारी अधिकारियों का वेतन, कर्मचारियों का वेतन, जिससे विकास का कोई काम नहीं। हमारी सरकार के कुल खर्च का 90% यही खर्च है, मात्र 10% खर्च उपयोग किया जाता है।

राम जी उल्टा कह रहे हैं वह भरत को कह रहे हैं कि “10% खर्च तो अपना होना चाहिए और 90% खर्च प्रजा के ऊपर होना चाहिए”।

अब श्री राम जी की कल्पना में मैं बजट बना रहा हूँ राम राज्य का बजट और अगले साल उस पर बात करूँगा, ऐसा बजट होना चाहिए जिसमें 10% खर्च फालतू का हो, सरकार का हो, बाकी 90% खर्च विकास पर हो, तो बजट ऐसा होना चाहिए, बजट ऐसा तो नहीं कि उनके राज्य में बचत नहीं होता होगा, तब समझ में आएगा कि राम राज्य का बजट कैसा होगा? फिर वह कहते हैं कि “तुम्हारी जो सुरक्षा व्यवस्था है वह तुम्हारे कुल खर्च से 15% के ज्यादा नहीं होनी चाहिए, अधिक से अधिक और कम से कम 5% रहना चाहिए फिर वह आगे कह रहे हैं कि “तुम तुम्हारे राज्य के अधिकारियों और मंत्रियों में कालिटी देखते हो या चापलूसी गुण देखते हो, या उनकी चापलूसी वह तुम्हारे आगे पीछे हां जी -