भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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श्री राम – “वही काम करते हो जो मैं करता हूँ, प्रजा के बीच जाते हो वहां जाकर उनका दुख-दर्द सुनते हो उनका हाल-चाल लेते हो लौट कर आ कर मंत्री मंडल की मीटिंग बुलाकर उसमें बात करते हो या नहीं करते”।

भरत – “हां मैं नियमित रूप से करता हूँ लेकिन कोई-कोई दिन प्रमाद आ जाता है मैं सुबह नहीं उठ पाता क्योंकि मेरे कुछ पुराने संस्कार है जो नाना के यहां से आए हैं तो उनके चलते कभी-कभी होता है तो राम कहते हैं “अब तुम राजा हो सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना बिना अवरोध के प्रजा के बीच जाकर दुख दर्द सुनना” तो श्री राम कहते हैं, “तुम राम राज्य के अधिकारी हो तो राम राज्य की परिभाषा है, कि राजा हमेशा प्रजा के बीच में जाकर दुख-दर्द ले”।

भारत का कौन सा प्रधानमंत्री सुबह-सुबह प्रजा के बीच में जाता है? कोई जो प्रतिदिन प्रजा के बीच जाकर उनका दुख दर्द सुनकर आए, गलती से कोई हेलीकॉप्टर में बैठकर आते हैं तो बाढ़ राहत का काम देखने के लिए, जो दिखाई नहीं देता इतनी ऊंचाई से। अभी मैंने सुना है कि राजस्थान में 100 साल का रिकॉर्ड टूटा है बाढ़ का तो यहां के जो राजा है मुख्यमंत्री वह हेलीकॉप्टर में बैठकर ऐसे-ऐसे स्थानों में गए जहां बाढ़ ही नहीं आई थी, तो पत्रकार को पूछा गया कि तुम भी तो बैठे थे मुख्यमंत्री के साथ, तो कहा कि हां बैठे था, तो तुमने क्यों नहीं बताया, तो उसने कहा जो बताने के लिए कहा गया था उतना ही बताया, तो हमारे मंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, प्रधानमंत्री महोदय, राज्यपाल महोदय, प्रजा के बीच में तो नहीं जाते, वो तो उड़न खटोले पर बैठे रहते हैं कहीं धूम टहल के चक्कर लगाते आ जाते हैं जहाँ बाढ़ राहत का काम होता रहता है। साल भर ऐसे ही चलता रहता है, राम कहते हैं कि “राजा को हमेशा प्रजा के बीच में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जाना चाहिए”, कौन प्रधानमंत्री ब्रह्म मुहूर्त में उठता है? हिंदुस्तान का पता नहीं कितने प्रधानमंत्री आए थे, रात भर दारू पीते सुबह उठने का तो प्रश्न ही नहीं है, कितने मुख्यमंत्री है जो दारू में ही डूबे रहते हैं, फिर वह आगे का प्रश्न पूछ रहे हैं कि “तुम तुम्हारे जो एडवाइजर(सलाहकार) है इनमें से किस पर भरोसा करते हो जो पैसे लेकर काम करते हैं या जो अवैतनिक सेवाएं करते हैं”। एडवाइजर दो तरीके के हैं एक तो वह जिनको पगार देते हैं, एक ऐसे हैं जो बिना पगार के काम करते हैं, तो भरत कहते हैं, “मैं तो ज्यादा भरोसा उन पर करता हूँ जो बिना पगार के कार्य करते हैं”। तो श्रीराम कहते हैं कि, “वही सही सलाह देंगे, जो तुमसे धन ले गए या संपत्ति ले गए वह तुम्हारा मूड देखेंगे, कि तुम क्या चाहते हो वही बोलेंगे।”,

तो आजकल हमारे देश में कोई प्रधानमंत्री अवैतनिक सलाहकार रखता ही नहीं है, सब वैतनिक सलाहकार है, मंत्रियों की सुविधाएं सभी सलाहकारों को है। तो प्रधानमंत्री को ऐसी सलाह देते हैं, जो प्रधानमंत्री चाहते हैं वैसे ही देश चलता है।

फिर राम जी आगे कह रहे हैं कि “जब तुम मंत्रिमंडल की बैठक करते हो तो कोई मंत्री ऐसा तो नहीं जो अंदर की बात बाहर जाकर बोलता हो,