श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
पृष्ठ 25, कुल 32 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्योंकि घी बिकेगा और घी को जलाकर फूँक देना है ताकि नया घी हमेशा बनता रहेगा”, यह बहुत दूर की बात है तो राम जब इस बात को बहुत विस्तार से समझाते हैं, तब भरत कहते हैं, “क्षमा करना भाई मुझे यह समझ में नहीं आता था, अब पता चल गया है कि पुरोहित राज्य व्यवस्था के अर्थ को समझते हैं, इसलिए वह भी आचार्य और गुरुओं के समकक्ष हैं, तो राम कहते हैं “देखो कभी कभी ऐसा हो जाए कि गुरुओं का सम्मान कुछ कम हो या आचार्यों का कम हो जाए लेकिन पुरोहितों का कम नहीं होने देना है, क्योंकि यह है तो राज्य की अर्थव्यवस्था है, अर्थव्यवस्था मजबूत है तो धन टिकेगा, धन टिकेगा तो राज्य बढेगा”। यह प्रसंग हमारी आंखें खोलने वाला है आज तक हमारे देश में पुरोहितों को गाली देने का काम आधुनिक पढ़े-लिखे लोगों ने बहुत किया है कि यह पौगा है ऐसे शंख बजाते हैं, ऐसे घंटे बजा देते हैं, यहाँ हमको इतना ही दिखाई देता है इसके आगे का कुछ दिखाई नहीं देता, कि वह कितनी बड़ी इकोनॉमी चला रहे हैं और राम आगे का प्रश्न पूछ रहे हैं कि “पुरोहित का सम्मान करो उनका ध्यान रखना कि वे कभी पैसें के लिए कुछ ना करते हो”, एक पुरोहित ऐसे आए जो पैसा लेकर पूजा कराते हैं तो राम कहते हैं कि “ऐसा पुरोहित है तो उनका सम्मान करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जो ज्यादा पैसा देगा वह उसी का माल की बिक्री बढ़ जाएगी इसलिए पुरोहित उन्हीं का सम्मान करना है, जब पैसा खुद ना लेते हो और कारीगरों का माल भी बिकवाने में मदद करें, तो बिना पैसे लिए जो पूजा कराएँ वह पुरोहित है, पैसे लेकर जो कराएँ राम उसको अच्छा नहीं मानते तो अगला ही प्रश्न वह कहते हैं कि क्या तुम्हारे राज्य के पुरोहित पैसा लेकर पूजा कराते हैं अगर कराते हैं तो उनको किनारे रख दो तो भरत कह रहे हैं कि “मैं यहाँ से लौटकर ऐसे ही व्यवस्था कर लूँगा जो बिना पैसे के पूजा कराएँ” तो राम कह रहे हैं कि “पुरोहित को तो जिस घर में पूजा करानी है वहाँ का पानी भी ग्रहण नहीं करना चाहिए, क्योंकि जो बड़ा काम वह करने जा रहा है और घर का पानी-पीने लगे खाना ही खाना लगे तो लालच भाव आएगा और वह अपनी पुरोहिताई से दूर हो जाएगा अब इसको जरा समझे थोड़े विस्तार में की पुरोहित पूजा कराने वाले के घर खाना ना खाए, पानी ना पिए, अंग्रेजों ने इसी को प्रचार किया है कि छुआछूत मचाते हैं पानी भी नहीं पीते, मूर्ख अंग्रेजों को पता नहीं था कि वह श्रीराम की किसी बात का पालन करते हैं जिसके घर पूजा कराते उसके घर पानी भी नहीं पीना, पानी कहीं और जाकर पीना है। अंग्रेजों ने इसको छुआछूत से जोड़ दिया और हिंदुस्तान के कुछ मूर्ख इतिहासकारों ने उस पर पुस्तकों पर पुस्तक लिख डाली कि ये छुआछूत मचाते हैं, यह तो गरीबों के घर का पानी नहीं पीते, यह तो नीची जाति और ऊँची जाति करते रहते हैं, यह ऊँची-नीची जाति का प्रश्न नहीं, था जिनके घर पूजा कराने गये हैं, वह कोई भी जाति का हो, कोई भी संप्रदाय का हो, वहाँ पर पानी नहीं पीना है, भोजन नहीं ग्रहण करना है, दक्षिणा नहीं लेनी है, प्रसाद नहीं लेना है, यह श्री राम बोल कर गए तो उनका पालन करते हैं, फिर आगे का प्रश्न वह पूछते हैं “भरत तुम सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठते हो”? तो भरत कहते “हां”