श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभरत – “मेरे मन में कभी कभी ऐसा प्रश्न आता है कि पुरोहितों को इतना ही सम्मान क्यों देना जितना आचार्य को जितना गुरुओं को जितना किसी और, क्योंकि हम मानते हैं भगवान तो घट-घट में हैं, ईश्वर तो हर कण में व्याप्त है पुरोहित कर्मकांड की तरफ लेकर जाते हैं और तरीके बता देते है पूजा के, जबकि ईश्वर तो कण-कण में हैं, घट-घट में है, भावना से ईश्वर है, पुरोहिताई में क्या है”?
रामजी का उत्तर सुनिए वह कहते हैं।
श्री राम – “देखो भरत यह पुरोहित तुम्हारे राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है जरा समझो इस बात को रीढ़ की हड्डी है, पूरी अर्थव्यवस्था इन पुरोहितों के दम से चलती है”
भरत कहते हैं “समझ में नहीं आ रहा” तब राम कह रहे हैं “धर्मस्य मूलम अर्थम, अर्थस्य मूलं कामम” और इसी बात को राम जी के जाने के कुछ लाख साल के बाद चाणक्य बोल कर गए ‘धर्मस्य मूलम अर्थम, अर्थस्य मूलं कामम’। पहले मुझे ऐसा लगता था जब तक मैंने कंब रामायण नहीं पढ़ी थी, और यह रघुवंशम नहीं पढ़ी थी तो मैं मानता था धर्मस्य मूलम अर्थम, अर्थस्य मूलं कामम, इसके मूल रचयिता चाणक्य है, जो बड़े अर्थशास्त्री रहे इस देश में। लेकिन अब पता चला है कि चाणक्य से लाखों साल पहले रामचंद्र जी यह कह रहे हैं वह कहते हैं कि अगर तुम्हारी अर्थव्यवस्था मजबूत है तो धर्म मजबूत होगा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पुरोहितों का सबसे बड़ा योगदान है तो फिर भी भरत को समझ में नहीं आ रहा तो रामचंद्र जी और उदाहरण देकर कहते हैं कि “देखो पुरोहित क्या करता है पुरोहित पूजा करता है और पूजा करवाता है किसी कथा की, सत्यनारायण की, जो भी करवाता है, लेकिन एक लिस्ट बनाता है, कि 10 घंटे ले आना एकदम कोरे होने चाहिए, 20 मीटर कपड़ा ले आना एकदम नया होना चाहिए, इतनी चूड़ियां ले आना बिना पहनी हुई होनी चाहिए, 10 किलो घी ले आना, यह सामग्री ले आना, यह ले आना, ऐसा-वैसा कर लेना”। मैंने यह एक रामायण में लिस्ट देखी तो कम से कम 108 थी, राम समझा रहे देखो “जब पूजा भगवान की कराएगा वह तो भावना से भी हो सकती है लेकिन जान पूछ कर वह वही चीजें बताएगा क्योंकि कारीगर जो इन चीजों को बनाएगा वह भी तो चाहिए”, उस दिन मेरे समझ में आया श्री राम जी की परिभाषा की पुरोहित मार्केटिंग मैनेजर होते हैं। अब समझ में आया इनसे बड़ा मार्केटिंग मैनेजर कौन होगा? अब देखो वह कह रहे हैं घंटे ले आना कुम्हार का काम बढ़ा कि नहीं, फिर घंटे के ऊपर ढकने के लिए ढक्कन और ले आना, तो कुम्हार का काम और बढ़ा, बिक्री बढ़ी, फिर कहते हैं कुल्लड़ ले आना उस पर प्रसाद रखेंगे तो मिट्टी में पवित्रता होती है, पवित्रता तो हर चीजों में होती है लेकिन मिट्टी के नए-नए बर्तन पूजा में लाएगा और ऐसी और सैकड़ों पूजा होती जाएगी तो कुम्हारों का काम जिंदगी भर चलता रहेगा, तो कारीगरों को जिंदा रखना है तो वह पुरोहित ही है वह नए-नए कपड़े मंगाते हैं तो जुलाहो का काम चलेगा, बुनकरों का काम चलेगा, धुनकरो का काम चलेगा, वह बांस मगवायेगा, नया-नया घी मगवाया जायेगा, जिससे यज्ञ कराना है तो घी बनाने वालों का काम चलेगा, उनकी गाय की संख्या बढ़ेगी