श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंआएगा वरना यह रावण राज यही चलता जाएगा जो अंग्रेजों ने चलाया था अब वही काले अंग्रेज चला रहे हैं बस इतना ही अंतर है, पहले गोरे अंग्रेज चला रहे थे, अब काले अंग्रेज चला रहे हैं, अभी इसके बाद मैं श्री राम जी की कथा में एक ऐसे अंश पर आता हूँ जो बीच का अंश है जिसको मैंने बाद के लिए रखा था, राम जी की कथा में एक स्थान पर ऐसा है जब वह वन चले गए और उनके पिताजी का स्वर्गवास हो गया तो उनके छोटे भाई भरत राम जी के पास आए और उनसे कहे कि चलो भाई वापस आपकी गद्दी, आप संभालो पिता जी का स्वर्गवास हो गया है, तो राम और भरत का संवाद है और मेरा मानना यह है कि भारत की सभी राम कथाओं का सबसे केंद्रीय स्थान अगर कोई है, तो वह राम भरत संवाद है इसमें आप सब कुछ समझ सकते हैं पूरी दुनिया पूरा ब्रह्मांड पूरी व्यवस्था है, सब इसी में समाहित है भरत राम का संवाद अगर रामचरितमानस में पढ़ना हो तो अयोध्या कांड में है वाल्मीकि रामायण में पढ़ना हो तो वहां भी है, रघुवंशम जो कालिदास की सबसे सुंदर कृति है उसमें एक सर्ग है 12 नंबर का सर्ग, उसमें भरत राम संवाद है और 12वीं सर्ग का एक उपसर्ग है, जिसको श्री कालिदास ने नाम दिया है कश्चित् सर्ग अद्भुत है, कंबन रामायण में बहुत विस्तार से है, कालिदास का रघुवंशम बहुत विस्तार से है, राम चरित्र मानस में थोड़ा संक्षेप में है, वाल्मीकि रामायण में थोड़ा विस्तार में है, यह जो सर्ग है बहुत ही अद्भुत है। मैं मानता हूँ की राम कथा में इससे अच्छा कोई अंश नहीं है। इसमें राम से मिलने के लिए जब भरत आते हैं, और बताते हैं कि पिताजी की मृत्यु हो गई है, राज्य को चलाना मेरे लिए तो मुश्किल है, आपको चलना पड़ेगा, तो राम जी उनसे कई प्रश्न पूछ रहे हैं, और सारे प्रश्न हमें बताते हैं कि राम राज्य कैसा होता है? और महात्मा गाँधी ने इसी राम-राज्य की बात कही है, तो भरत आये, हाल-चाल पूछा, गले लगकर रोये, फिर शान्ति के साथ बैठे हैं भरत। और राम जी का पहला प्रश्न जो भरत से पूछ रहे हैं वो यह कि “तुम जिस राज्य से आये हो आयोध्या का राज्य, तुम कहते हो कि राम का राज्य है, मेरा राज्य है, तो मैं पूछता हूँ, कि इस राज्य को चलाने के लिए, नीति, नियम, कानून के बारे में मैं प्रश्न करता हूँ, तुम उनका उत्तर ‘हाँ’ में देते हो तो मैं मानूंगा, कि वो राम राज्य है और ‘ना’ में दे रहे तो मैं नहीं मानता कि वो राम-राज्य है।
भरत – “आप प्रश्न पूछिए, जितनी मेरी हैसियत है, क्षमता है, मैं दूंगा”
श्री राम – “तुम अपने राज्य के आचार्यों का, गुरुओं का, वैद्यों का, पुरोहितों का, अग्रजों का ऐसा ही सम्मान करते हो, जैसा मैं करता था”?
भरत – “हाँ, मेरी कोशिश तो यही है, कि मैं सभी अग्रजों का सम्मान करूँ, मेरी कोशिश तो यही है, मैं मेरे गुरुओं का सम्मान करूँ, मैं कोशिश यही करता हूँ कि आचार्य का सम्मान करूँ, लेकिन पुरोहित के बारे में मुझे थोड़ी आशंका रहती है”
श्री राम – “क्यों इसमें आशंका क्या है? पुरोहितो तो कर्मकांड ही कराते हैं, तो तुमने क्या मान लिया वह गुरुओं से नीचे है? क्या वह आचार्यों से कम है”?