भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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साल में जितनी महंगाई थी, उससे हजारों गुणा महंगाई बढ़ी है, आजादी के साल के कुछ आंकड़े बताता हूँ आजादी के साल में 1 रुपये में 50 किलो गेहूँ मिलता था, आज 50 किलो गेहूँ 300 रुपये में मिलेगा या 350 रुपये में । आजादी के साल में एक रुपये में 2 किलो शुद्ध गाय का घी मिलता है अब 2 किलो घी ढूँढने जाओ तो 800 रुपये तक से नीचे नहीं मिलेगा मिलावट वाला 400 रुपये का । आजादी के साल में किसी के भी घर में 20 रुपये इकट्ठा हो जाए तो सोना खरीद लेते थे, अब 10 ग्राम सोना खरीदने के लिए कम से कम 10000 रुपये हो तब कल्पना हो सकती है, आजादी के साल में किसी भी कर्मचारी की पगार 20 रुपये होती थी तो 12 रुपये में घर का खर्चा चलता था और 8 रुपये बचा लेता था और सुखी रहता था अब आजादी के 50 साल बाद 10000 रुपये महीने की पगार मिल जाए तो भी उसका खर्च नहीं चलता महंगाई बहुत बढ़ी है, गरीबी बहुत बढ़ी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार बहुत बढ़ा और आजादी के साल में भारत की सरकार बोलती है 33% भारतीय जमीन पर जंगल था, अब आजादी के 60 साल के बाद 17% पर ही जंगल रह गया, मतलब आधे जंगल खत्म हो गए आजादी के बाद यह सच्चाई के साथ भारत में इंडियन फॉरेस्ट है फिर भी जंगल साफ होते चले जा रहे हैं, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट है जिस पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं हर साल सरकार के, लेकिन जंगल नहीं बढ़ रहे, कम हो रहे हैं । आजादी के बाद पर्यावरण का प्रदूषण बढ़ा है, आजादी के बाद पानी का प्रदूषण बढ़ा है, आजादी के साल में जो गंगा पथ गामिनी होती थी जिसका गंगाजल पीकर हम पवित्र मानते थे, आज उस गंगा की हालत कही-कही ऐसी है कि आप पानी छूने की हिम्मत ना करें नहाना तो दूर की बात है, इतना मैला कर दिया, और जमुना तो इतनी मैली हो गई है कि कीचड़ ही कीचड़ दिखाई देता है पानी नहीं है नदियों का नाश हुआ है, समुंदरों का नाश हुआ है, आजादी के साल में भारत में लगभग लगभग 6 लाख तालाब और तलैया थे आज आजादी के 60 साल के बाद उसमें आधे से ज्यादा बंद हो गए हैं या सरकारों ने उनकी जमीन हड़प ली है, और बिल्डिंग खड़ी कर दी है, या लैंड माफिया वाले लोगों के अधिकार में वह तालाब चले गए, किसी भी शहर में देख लो एक भी समस्या हल नहीं हो रही है हर समस्या का रूप बढ़ता ही जा रहा है, शायद श्री राम जी जो विभीषण को कह रहे हैं देखो सत्ता हस्ताक्षर मात्र किसी भी राज्य का समाधान नहीं होता व्यवस्था बदलने चाहिए तब राज्य की व्यवस्था समस्या खत्म होती है यदि श्रीराम से हमने इतना ही सीख लिया होता की सत्ता हस्ताक्षर ही नहीं है व्यवस्था भी बदलो तो शायद भारत की समस्याओं का समाधान 60 साल में हो गया होता और अब श्री राम जी की कथा से बार-बार यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की कोई भी समस्या का समाधान करना है तो सत्ता बदलने से नहीं होगा व्यवस्था बदलने से होगा, हम एक पार्टी को चुनकर लाए उसको हटाकर दूसरी लाए, दूसरे को हटाकर तीसरी लाए, तीसरी से चौथी को लाए, कुछ होने वाला नहीं । बड़े-बड़े महान लोगों को प्रधानमंत्री बनाए कुछ फायदा नहीं जब तक व्यवस्था नहीं बदलेगी । कितना भी अच्छा कोई प्रधानमंत्री बिठा दो उसमें से कुछ निकलने वाला नहीं, क्योंकि यह मैंने नहीं कहा लाखों साल पहले श्री राम जी बोलकर गए हैं । रामराज्य की बात हम करें कि रामराज्य स्थापित करना है तो पहला ही सूत्र शुरू होगा कि भारत का व्यवस्था परिवर्तन करना होगा, तब भारत में राम राज्य