भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 32 में से

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सत्ता, विभीषण को मिली, लेकिन रावण का राज्य वैसा का वैसा ही है इसके मंत्री, इसके महामंत्री, इसके बाद इसके खजांची, इसके अधिकारी, इसकी सेना, इसका सेनापति, यह सब वैसे के वैसे ही है, अगर तुम चाहो तो इनको बदलो तो तुम्हारे राज्य की समस्याएं हल होगी अगर तुमने इन प्रशासनिक व्यवस्था को नहीं बदला तो एक भी समस्या का समाधान नहीं होगा ,और मैं यह कह सकता हूँ कि समस्याएं बढ़ेंगी, तो वह पूछ रहे हैं कि यह आप कैसे कह रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि देखो रावण ने अपना राज्य स्थापित किया उसके आधार पर है धर्म को अधर्म बनाया और धार्मिक कार्य को अधार्मिक बनाकर उसने परिवर्तन करा दिया अगर यही कानून कायदे चलाये गए तो तुम्हारी प्रजा को कोई लाभ नहीं मिलेगा, तुम मजा कर सकते हो लेकिन प्रजा की समस्या वैसे ही रहेगी, अब तुम फैसला करो कि तुम्हें प्रजा का राजा होना है या गद्दी का । तो विभीषण कह रहे हैं कि मैं तो प्रजा का राजा होना चाहता हूँ, तो राम कह रहे हैं कि सबसे पहला काम करो रावण के बनाये हुए कायदे कानून और नियम सब खत्म करो, जला दो, नए नियम कानून बनाओ और ऐसे नियम कानून बनाओ जो सनातन पर आधारित हो, ऐसा सत्य नहीं जो आज है और कल बदल जाए, ऐसा सत्य है जो हजारों साल पहले था हजारों साल रहेगा और राम कहते हैं किसी भी राज्य की सत्ता का हस्ताक्षरण हो और राज्य की व्यवस्था ना बदले तो उस राज्य या उस देश की समस्या का समाधान नहीं होता ।

भारत की समस्याओं को मैं भी इसी तरह देखता हूँ अब श्री राम जी की बात करें 15 अगस्त 1947 को भारत में सत्ता का हस्तांतरण हुआ लॉर्ड माउंटबेटन के हाथ से सत्ता निकलकर पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथ में आ गए, बाकी क्या बदला? अंग्रेजों ने भारत का जो लूटमार करने के 34735 कानून बनाए वह सब के सब भारत की आजादी के बाद भी चल रहे हैं, तो श्री राम जी के शब्दों के अनुसार भारत की किसी भी समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि व्यवस्था वही है जो रावण के समय थी रावण का समय, माने अंग्रेजों का समय, और रावण का ही राज्य था, एक भी कानून नहीं बदला अंग्रेज माने रावण, मैं बिल्कुल स्पष्ट कह रहा हूँ रावण और अंग्रेजों में कोई अंतर नहीं था, तो रावण ने और अंग्रेजो ने जो कानून बनाए सीआरपीसी, सीपीसी, सब के सब वैसे के वैसे ही चल रहे हैं, अंग्रेजों ने कानून बनाये इंडियन पुलिस एक्ट, वो वैसा का वैसा ही चल रहा है, अंग्रेजों ने कानून बनाया लैंड रेवेन्यू एक्ट, वैसे ही आज चल रहा है ,और अंग्रेजों के बनाए राज्य स्तर पर वह सब कानून वैसे के वैसे ही चल रहे इसलिए भारत की कोई भी समस्या का समाधान आजादी मिलने के 60 साल बाद भी नहीं हो रहा है । गरीबी आजादी के साल में जितनी थी उससे बढ़ी है कम नहीं हुई । 1947 में हम आजाद हुए तो भारत में चार करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे थे अब सन 2006 में 40 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे है।

अब आप कहोगे की जनसंख्या बढ़ गई है जनसंख्या तो बहुत थोड़ी बड़ी है 1947 में हम 34 करोड़ थे अब हम 108 करोड़ हो गए जनसंख्या पर 3 गुना बढ़ी है और गरीबी 10 गुना बढ़ी है आजादी के साल में हमारे देश में बेरोजगारों की संख्या 2 करोड़ थी अब 2006 में 20 करोड़ हुई है, तो बेरोजगारी भी बढ़ी है, गरीबी भी बढ़ी है, आजादी के साल में जितना भ्रष्टाचार था उससे हजारों गुना भ्रष्टाचार बढ़ा है, यह हम सब मानते हैं आजादी के

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