श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगांधी जी ने “भारत में राम-राज्य स्थापित हो”, इस पर बहुत कुछ उन्होंने लिखा व बोला लेकिन जब जब गांधीजी के सामने यह प्रश्न आया कि आपकी जो कल्पना है रामराज्य की है वह क्या है? तो गांधी जी ने बहुत सहजता से उत्तर दिया कि जो भगवान श्रीराम ने कहा वही, अब भगवान श्रीराम ने रामराज के बारे में, अपने राज्य के बारे में कहाँ कुछ कहा इस दृष्टि से बहुत दिन मैं खोजता रहा और बहुत सारी राम कथा के जो विद्वान लोग हैं, मर्मज्ञ हैं, उनसे मिलता रहा कि भगवान श्रीराम ने रामराज्य के बारे में क्या कहा? ज्यादातर जगह मुझे निराशा हाथ लगी जितने भी रामकथा के बादशाह हैं, जिनके पास में यह प्रश्न लेकर गया कि भगवान श्रीराम ने रामराज्य के बारे में क्या कहा अपनी राज्य के बारे में क्या कहा रामराज्य होता कैसा है? उसकी सेना कैसी होती है? उसकी अर्थव्यवस्था कैसी होती है? उसके नियम कायदे कानून कैसे होते हैं? उसकी राजनीति क्या है? उसकी सीमाएं कैसी हैं? ऐसे प्रश्नों को लेकर जब-जब मैं साधु-संतों से मिलता रहा तो निराशा ही हाथ लगी।
मैंने फिर पढ़ना शुरू किया सबसे पहली रामकथा मैंने पढ़ी तो श्रीरामचरितमानस और वह पढ़ने के पीछे तो बड़े आधार थे, सबसे बड़ा आधार यह था कि मेरी जो मां है वह हर दिन श्री रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ करती हैं हर दिन यह उनका दैनिक कर्म है और जब तक वह सुंदरकांड का पाठ नहीं करती है तब तक वह ना खाना बनाती है ना किसी को खिलाती है ना खाने देती हैं, तो कानों में उनके शब्द गूंजते रहे बचपन से मैं भी सुंदरकांड पढ़ता रहा मां के माध्यम से, कभी-कभी उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए भी बिठाया हमारे घर में एक पुरानी परंपरा सी है बहुत साल से चल रही है कि साल में एक बार श्री रामचरितमानस का पाठ होता है। 24 घंटे का जो अखंड पाठ होता है उसमें भी मैं बहुत दिन शामिल रहा बहुत दिन श्री रामचरितमानस का पाठ करने के बाद सोचा कुछ और भी पढ़ा जाए तो श्री वाल्मीकि रामायण पढ़ी उन्होंने भगवान श्री राम की कथा को जिस तरीके से कहा है या लिखा है वह गोस्वामी तुलसीदास जी की तुलना में बहुत अलग है, मेरे एक बहुत नजदीकी और जिनको मैं बहुत मानता हूँ अपने जीवन में गुरु है श्री धर्मपाल जी उनको एक बार ने चर्चा की तो श्री धर्मपाल जी ने कहा कि देखो अगर तुम रामराज्य को ही समझना चाहते हो राम कथा में से भारत में राम कथा लिखने वाले जो दक्षिण भारतीय कवि हैं या बड़े महान लोग हैं उसको भी जरा पढ़ो, तो मैंने पूछा क्यों? तो उन्होंने कहा की उसमें तुम्हें बिल्कुल भिन्न दृष्टि मिलेगी। तो दक्षिण भारत में पिछले कुछ वर्षों से घूमता हूँ तो वहां जो राम कथाएं लिखी गई हैं उनमें सबसे ज्यादा चर्चित और सबसे ज्यादा मानी जाने वाली कंब रामायण है। कंब रामायण तमिल के एक बहुत बड़े ऋषि हुए जैसे हम वाल्मिक का अपने यहाँ स्थान मानते हैं गोस्वामी तुलसीदास का मानते हैं वैसे ही तमिल समाज के लोग कम्ब ऋषि को बहुत मानते हैं। तो कम्ब बहुत बड़े ऋषि हुए उन्होंने श्री राम जी की कथा लिखी है और उसको दक्षिण भारत में कंबन रामायण के रूप में जाना जाता है और मैंने जब श्री कंबन रामायण को पढ़ा तो अद्भुत लगी मुझे ऐसा लगा कि मुझे बहुत सारा ज्ञान आसानी से उसमें में फिर श्री राम जी की कथा एक बहुत बड़े कवि ने भी लिखी है आप सब जानते हैं मध्य भारत के बड़े कवि श्री कालिदास उन्होंने श्री राम जी