भारतकोश
श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान

Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा

स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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की कथा लिखी है रघुवंशम , अद्भुत कथा है वह भी, मैंने पढ़ी बार-बार पढ़ी तो ऐसा करके 8-10 तरह की राम कथा है या श्री राम जी की जीवनी पढ़ी, वह सब पढ़ने के बाद कुछ मेरे समझ में आया वह निचोड़ आपको अगले 1 घंटे में कहना चाहता हूँ इस बात का ध्यान रखेंगे कि मैं जो भी कुछ कह रहा हूँ वह भारत की वर्तमान समस्याओं के समाधान के संदर्भ में कहूँगा कि राम जी की कथा में से भारत की समस्याओं के समाधान कैसे निकले? आज की जो समस्याएं हम देख रहे हैं अपने देश में राजनीतिक स्तर पर हो, या सामाजिक समस्याएं हो हमारी सभ्यता में आई हुई समस्याओं या संस्कृति के स्तर पर हो इन सभी के समाधान श्री राम जी की कथा में से मुझे दिखाई देते हैं और अब मुझे समझ में आता है कि महात्मा गांधी किस रामराज्य की बात करते थे गांधी जी जब बार-बार कहते थे कि अगर भारत में रामराज्य हो जाए तो सब समस्याओं का समाधान हो जाए अब मुझे उस बात पर बिल्कुल स्पष्टता है, और दिखाई देता है कि अगर इस देश को राम राज्य के रास्ते पर ले जाएं तो कैसे समस्याओं का बहुत सरल और सुखद समाधान हमें मिल सकता है। श्री राम जी की कथा आप सब जानते हैं कथा कहने में मैं समय खराब नहीं करूँगा क्योंकि कथा आप सभी ने सुनी है, कथा के बीच में जो बिटवीन द लाइंस होती हैं संवाद जो होते हैं जिनमें से कोई बात को पकड़कर विश्लेषण किया जा सकता है, ऐसी कुछ बातें आपके बीच में रखूँगा और श्रीराम के चरित्र में जो बातें मुझे बहुत अच्छी लगती है वह भी आपसे मैं शेयर करने की कोशिश करूँगा मैंने अपने सुविधा की दृष्टि से श्री राम जी की कथा को दो हिस्सों में बांटा या श्रीराम के जीवन को दो हिस्सों में बांटा एक हिस्सा है उनके जीवन का पूर्वार्ध और दूसरा हिस्सा है उनके जीवन का उत्तरार्ध। पूर्वार्ध का जो हिस्सा है उनके जन्म लेने से और उनके वन गमन के 1 दिन पहले तक का है। जब उनका जन्म होता है और वह अपने पिता के घर आते हैं अपनी माता कौशल्य्या की कोख से पैदा होकर तो उस दिन से लेकर और वन गमन के लिए प्रस्थान करें, वो जीवन का उनका पूर्वार्ध किया है, यह मैंने किया है किसी दूसरे का नहीं है, सुविधा की दृष्टि से समझने के लिए। तो उनके जीवन का एक तो है पूर्वार्ध और दूसरा है उत्तरार्ध। उत्तरार्ध अयोध्या की सीमा को छोड़कर वन में चले जाते हैं 14 वर्ष के लिए, वो उनके जीवन का उत्तरार्ध हैं, इन्हीं दो हिस्सों में मैंने बांटा है, और जब वह वापस लौटते है रावण पर विजय प्राप्त करके, विभीषण को राजा घोषित करके, वो हिस्सा पूर्वार्ध हैं। पूर्वार्ध में, श्रीराम का उसमें बचपन का जो है वह तो ऐसे सभी राजाओं के बेटे बेटियों का है वैसा ही है वह अपने पिता के बहुत लाडले हैं उनके पिता उम्र बहुत ज्यादा ही स्नेह रखते हैं मां भी उनको बहुत ज्यादा स्नेह करती है और श्री राम जी के बारे में माना जाता और कहा भी जाता वह खुद अपने मुंह से कहते हैं कि उनके ऊपर श्रीमती कौशल्य्या का स्नेह तो है कैकयी का विशेष स्नेह है, सुमित्रा का भी है लेकिन कैकयी का विशेष स्नेह है, और राम जी इसको बार-बार स्वीकार करते हैं वह मानते हैं कि माता की कोई कृपा मेरे ऊपर हुई है जो मुझे 14 वर्ष का वनवास मिला है जो मेरे जीवन में मैं चाहता हूँ वैसा करने का रास्ता खोल रहा हैं, बड़े होते हैं और जैसे ही उनकी उम्र 14 वर्ष के आसपास आती है तो वह राजकाज के काम में रुचि लेना प्रारंभ करते हैं तो उनके पिता श्री दशरथ ने उनको एक जिम्मेदारी सौंपी है जिसको कई वर्ष तक वह निभा रहे हैं बहुत ईमानदारी से और निष्ठा से। जिम्मेदारी क्या है, श्री दशरथ उनको