श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 795, कुल 1058 में से
संदर्भ में पढ़ें- लङ्काकाण्ड *
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फिर [तूने सुना ही होगा कि] आकाशरूपी तालाबमें मेरी भुजाओंरूपी कमलोंपर बसकर शिवजीसहित कैलास हंसके समान शोभाको प्राप्त हुआ था! ॥ २२ (ख) ॥
तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद । मो सन भिरिहि कवन जोधा बद ॥ तव प्रभु नारि बिरहं बलहीना । अनुज तासु दुख दुखी मलीना ॥
अरे अंगद! सुन; तेरी सेनामें बता, ऐसा कौन योद्धा है जो मुझसे भिड़ सकेगा। तेरा मालिक तो स्त्रीके वियोगमें बलहीन हो रहा है। और उसका छोटा भाई उसीके दुःखसे दुःखी और उदास है ॥ १ ॥
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ । अनुज हमार भीरु अति सोऊ ॥ जामवंत मंत्री अति बूढ़ा । सो कि होइ अब समरारूढ़ा ॥
तुम और सुग्रीव, दोनों [नदी] तटके वृक्ष हो। [रहा] मेरा छोटा भाई विभीषण, [सो] वह भी बड़ा डरपोक है। मन्त्री जाम्बवान् बहुत बूढ़ा है। वह अब लड़ाईमें क्या चढ़ (उद्यत हो) सकता है? ॥ २ ॥
सिलिपकर्म जानहिं नल नीला । है कपि एक महा बलसीला ॥ आवा प्रथम नगरु जेहिं जारा । सुनत बचन कह बालिकुमारा ॥
नल-नील तो शिल्प-कर्म जानते हैं (वे लड़ना क्या जानें?)। हाँ, एक वानर जरूर महान् बलवान् है, जो पहले आया था, और जिसने लङ्का जलायी थी। यह वचन सुनते ही बालिपुत्र अंगदने कहा— ॥ ३ ॥
सत्य बचन कहु निमिचर नाहा । साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा ॥ रावन नगर अल्प कपि दहई । सुनि अस बचन सत्य को कहई ॥
हे राक्षसराज! सच्ची बात कहो! क्या उस वानरने सचमुच तुम्हारा नगर जला दिया? रावण [जैसे जगद्विजयी योद्धा] का नगर एक छोटे-से वानरने जला दिया। ऐसे वचन सुनकर उन्हें सत्य कौन कहेगा? ॥ ४ ॥
जो अति सुभट सराहेहु रावन । सो सुग्रीव केर लघु धावन ॥ चलइ बहुत सो बीर न होई । पठवा खबरि लेन हम सोई ॥
हे रावण! जिसको तुमने बहुत बड़ा योद्धा कहकर सराहा है, वह तो सुग्रीवका एक छोटा-सा दौड़कर चलनेवाला हरकारा है। वह बहुत चलता है, वीर नहीं है। उसको तो हमने [केवल] खबर लेनेके लिये भेजा था ॥ ५ ॥
दो०— सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ ॥ २३ (क) ॥