श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 829, कुल 1058 में से
संदर्भ में पढ़ें- लङ्काकाण्ड *
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[वह बोला—] रावण और राममें महान् युद्ध हो रहा है। रामजी जीतेंगे इसमें सन्देह नहीं है। हे भाई! मैं यहाँ रहता हुआ ही सब देख रहा हूँ। मुझे ज्ञानदृष्टिका बहुत बड़ा बल है ॥ ३ ॥
मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल । कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल ॥ सर मज्जन करि आतुर आवहु । दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु ॥
हनुमान्जीने उससे जल माँगा, तो उसने कमण्डलु दे दिया। हनुमान्जीने कहा—थोड़े जलसे मैं तुम नहीं होनेका। तब वह बोला—तालाबमें स्नान करके तुरंत लौट आओ तो मैं तुम्हें दीक्षा दूँ, जिससे तुम ज्ञान प्राप्त करो ॥ ४ ॥
दो०—सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान ।
मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान ॥ ५७ ॥
तालाबमें प्रवेश करते ही एक मगरिने अकुलाकर उसी समय हनुमान्जीका पैर पकड़ लिया। हनुमान्जीने उसे मार डाला। तब वह दिव्य देह धारण करके विमानपर चढ़कर आकाशको चली ॥ ५७ ॥
कपि तव दरस भइउँ निष्पापा । मिटा तात मुनिबर कर सापा ॥ मुनि न होइ यह निसिचर घोरा । मानहु सत्य बचन कपि मोरा ॥
[उसने कहा—] हे वानर! मैं तुम्हारे दर्शनसे पापरहित हो गयी। हे तात! श्रेष्ठ मुनिका शाप मिट गया। हे कपि! यह मुनि नहीं है, घोर निशाचर है। मेरा बचन सत्य मानो ॥ १ ॥
अस कहि गई अपछरा जबहीं । निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं ॥ कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू । पाछें हमहिं मंत्र तुम्ह देहू ॥
ऐसा कहकर ज्यों ही वह अप्सरा गयी, त्यों ही हनुमान्जी निशाचरके पास गये। हनुमान्जीने कहा—हे मुनि! पहले गुरुदक्षिणा ले लीजिये। पीछे आप मुझे मन्त्र दीजियेगा ॥ २ ॥
सिर लंगूर लपेटि पछारा । निज तनु प्रगटेसि मरती बारा ॥ राम राम कहि छाड़ेसि प्राना । सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना ॥
हनुमान्जीने उसके सिरको पूँछमें लपेटकर उसे पछाड़ दिया। मरते समय उसने अपना (राक्षसी) शरीर प्रकट किया। उसने राम-राम कहकर प्राण छोड़े। यह (उसके मुँहसे राम-नामका उच्चारण) सुनकर हनुमान्जी मनमें हर्षित होकर चले ॥ ३ ॥
देखा सैल न औषध चीन्हा । सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा ॥ गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ । अवधपुरी ऊपर कपि गयऊ ॥
उन्होंने पर्वतको देखा, पर औषध न पहचान सके। तब हनुमान्जीने एकदमसे पर्वतको ही उखाड़ लिया। पर्वत लेकर हनुमान्जी रातहीमें आकाशमार्गसे दौड़ चले और अयोध्यापुरीके ऊपर पहुँच गये ॥ ४ ॥