श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४-सतीका अग्निप्रवेश ५-वीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध ६-ब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना ७-दक्षयज्ञकी पूर्ति ८-ध्रुवका वन-गमन ९-ध्रुवका वर पाकर घर लौटना १०-उत्तमका मारा जाना, ध्रुवका यक्षोंके साथ युद्ध ११-स्वायम्भुव-मनुका ध्रुवजीको युद्ध बंद करनेके लिये समझाना १२-ध्रुवजीको कुबेरका वरदान और विष्णुलोककी प्राप्ति १३-ध्रुववंशका वर्णन, राजा अंगका चरित्र १४-राजा वेनकी कथा १५-महाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक १६-वंदीजनद्वारा महाराज पृथुकी स्तुति १७-महाराज पृथुका पृथ्वीपर कुपित होना और पृथ्वीके द्वारा उनकी स्तुति करना १८-पृथ्वी-दोहन १९-महाराज पृथुके सौ अश्वमेध यज्ञ २०-महाराज पृथुकी यज्ञशालामें श्रीविष्णुभगवान्का प्रादुर्भाव २१-महाराज पृथुका अपनी प्रजाको उपदेश २२-महाराज पृथुको सनकादिका उपदेश २३-राजा पृथुकी तपस्या और परलोकगमन २४-पृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओँको भगवान् रुद्रका उपदेश २५-पुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ २६-राजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना २७-पुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र २८-पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना २९-पुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य ३०-प्रचेताओँको श्रीविष्णुभगवान्का वरदान ३१-प्रचेताओँको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद-लाभ
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