भारतकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पञ्चम स्कन्ध

१-प्रियव्रत-चरित्र
२-आग्नीध्र-चरित्र
३-राजा नाभिका चरित्र
४-ऋषभदेवजीका राज्यशासन
५-ऋषभजीका अपने पुत्रोंको उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना
६-ऋषभदेवजीका देहत्याग
७-भरत-चरित्र
८-भरतजीका मृगके मोहमें फँसकर मृगयोनिमें जन्म लेना
९-भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म
१०-जडभरत और राजा रहूगणकी भेंट
११-राजा रहूगणको भरतजीका उपदेश
१२-रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान
१३-भवाटवीका वर्णन और रहूगणका संशयनाश
१४-भवाटवीका स्पष्टीकरण
१५-भरतके वंशका वर्णन
१६-भुवनकोशका वर्णन
१७-गंगाजीका विवरण और भगवान् शंकरकृत संकर्षणदेवकी स्तुति
१८-भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन
१९-किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन
२०-अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोक-पर्वतका वर्णन
२१-सूर्यके रथ और उसकी गतिका वर्णन
२२-भिन्न-भिन्न ग्रहोंकी स्थिति और गतिका वर्णन
२३-शिशुमारचक्रका वर्णन
२४-राहु आदिकी स्थिति, अतलादि नीचेके लोकोंका वर्णन
२५-श्रीसङ्कर्षणदेवका विवरण और स्तुति
२६-नरकोंकी विभिन्न गतियोंका वर्णन

षष्ठ स्कन्ध