भारतकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1424

सत्कार पाकर चले गये। भगवान् श्रीकृष्ण ही परब्रह्म हैं, यह सुनकर युधिष्ठिरके आश्चर्यकी सीमा न रही ॥७९॥

परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें दक्षपुत्रियोंके वंशोंका अलग-अलग वर्णन सुनाया। उन्हींके वंशमें देवता, असुर, मनुष्य आदि और सम्पूर्ण चराचरकी सृष्टि हुई है ॥८०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे वैयासिक्यामष्टादशसाहस्र्यां पारमहंस्यां संहितायां सप्तमस्कन्धे प्रह्लादानुचरिते युधिष्ठिरनारदसंवादे सदाचारनिर्णयो नाम पञ्चदशोऽध्यायः ॥१५॥


॥ इति सप्तमः स्कन्धः समाप्तः ॥

॥ हरिः ॐ तत्सत् ॥


१. प्रा० पा०—भूतानि। २. प्रा० पा०—मुच्यते दैवसङ्गतम्। ३. प्रा० पा०—क्कायकर्मभिः। १. प्रा० पा०—शिवमया। २. प्रा० पा०—हि। १. प्रा० पा०—उपशान्तमतिर्विजह्यात्। २. प्रा० पा०—आवर्तते। ३. प्रा० पा०—पशुस्ततः। १. प्रा० पा०—विश्वोऽथ। २. प्रा० पा०—तत्रस्थोऽपि।