श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसत्कार पाकर चले गये। भगवान् श्रीकृष्ण ही परब्रह्म हैं, यह सुनकर युधिष्ठिरके आश्चर्यकी सीमा न रही ॥७९॥
परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें दक्षपुत्रियोंके वंशोंका अलग-अलग वर्णन सुनाया। उन्हींके वंशमें देवता, असुर, मनुष्य आदि और सम्पूर्ण चराचरकी सृष्टि हुई है ॥८०॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे वैयासिक्यामष्टादशसाहस्र्यां पारमहंस्यां संहितायां सप्तमस्कन्धे प्रह्लादानुचरिते युधिष्ठिरनारदसंवादे सदाचारनिर्णयो नाम पञ्चदशोऽध्यायः ॥१५॥
॥ इति सप्तमः स्कन्धः समाप्तः ॥
॥ हरिः ॐ तत्सत् ॥
१. प्रा० पा०—भूतानि। २. प्रा० पा०—मुच्यते दैवसङ्गतम्। ३. प्रा० पा०—क्कायकर्मभिः। १. प्रा० पा०—शिवमया। २. प्रा० पा०—हि। १. प्रा० पा०—उपशान्तमतिर्विजह्यात्। २. प्रा० पा०—आवर्तते। ३. प्रा० पा०—पशुस्ततः। १. प्रा० पा०—विश्वोऽथ। २. प्रा० पा०—तत्रस्थोऽपि।