भारतकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1562, कुल 1617 में से

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पृष्ठ 1562

अप्सराएँ प्रसन्न होकर नाचने लगीं। श्रेष्ठ गन्धर्व गाने लगे। मुनि, देवता, मनु, पितर और अग्नि स्तुति करने लगे ।।८।। सिद्ध, विद्याधर, किम्पुरुष, किन्नर, चारण, यक्ष, राक्षस, पक्षी, मुख्य-मुख्य नागगण और देवताओंके अनुचर नाचने-गाने एवं भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे तथा उन लोगोंने अदितिके आश्रमको पुष्पोंकी वर्षासे ढक दिया ।।९-१०।।

जब अदितिने अपने गर्भसे प्रकट हुए परम पुरुष परमात्माको देखा, तो वह अत्यन्त आश्चर्यचकित और परमानन्दित हो गयी। प्रजापति कश्यपजी भी भगवान्‌को अपनी योगमायासे शरीर धारण किये हुए देख विस्मित हो गये और कहने लगे 'जय हो! जय हो' ।।११।।

यत् तद् वपुर्भाति विभूषणायुधै— रव्यक्तचिद् व्यक्तमधारयद्धरिः । बभूव तेनैव स वामनो वटुः सम्पश्यतोर्दिव्यगतिर्यथा नटः ।।१२

तं वटुं वामनं दृष्ट्वा मोदमाना महर्षयः । कर्माणि कारयामासुः पुरस्कृत्य प्रजापतिम् ।।१३

तस्योपनीयमानस्य सावित्रीं सविताब्रवीत् । बृहस्पतिर्ब्रह्मसूत्रं मेखलां कश्यपोऽददात् ।।१४ ददौ कृष्णाजिनं भूमिर्दण्डं सोमो वनस्पतिः । कौपीनाच्छादनं माता द्यौश्छत्रं जगतः पतेः ।।१५

कमण्डलुं वेदगर्भः कुशान्सप्तर्षयो ददुः । अक्षमालां महाराज सरस्वत्यव्ययात्मनः ।।१६

तस्मा इत्युपनीताय यक्षराट् पात्रिकामदात् । भिक्षां भगवती साक्षादुमादादम्बिका सती ।।१७

स ब्रह्मवर्चसेनेवं सभां संभावितो वटुः । ब्रह्मर्षिगणसञ्जुष्टामत्यरोचत मारिषः ।।१८

समिद्धमाहितं वह्निं कृत्वा परिसमूहनम् । परिस्तीर्य समभ्यर्च्य समिद्भिर्जुहोद् द्विजः ।।१९

श्रुत्वाश्वमेधैर्यजमानमूर्जितं

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