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श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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अनामिका अंगुलिका स्पर्श करे। ‘ॐ तें ॐ नमो वाममध्यमायाम्’—इससे बायें हाथके अँगूठेसे बायें हाथकी मध्यमा अंगुलिका स्पर्श करे। ‘ॐ वां ॐ नमो वामतर्जन्याम्’—इससे बायें हाथके अँगूठेसे बायें हाथकी तर्जनी अंगुलिका स्पर्श करे। ‘ॐ सुं ॐ नमः ॐ दें ॐ नमो दक्षिणाङ्गुष्ठपर्वणोः’—इसको पढ़कर दाहिने हाथकी तर्जनी अंगुलिसे दाहिने हाथके अँगूठेकी दोनों गाँठोंका स्पर्श करे। ‘ॐ वां ॐ नमः ॐ यं ॐ नमो वामाङ्गुष्ठपर्वणोः’—इसका उच्चारण करके बायें हाथकी तर्जनी अंगुलिसे बायें हाथके अँगूठेकी दोनों गाँठोंका स्पर्श करे।

अङ्गन्यास

यहाँ द्वादशाक्षरमन्त्रके पदोंका हृदयादि अंगोंमें न्यास करना है— ‘ॐ नमो नमो हृदयाय नमः’—इसको पढ़कर दाहिने हाथकी पाँचों अंगुलियोंसे हृदयका स्पर्श करे।

‘ॐ भगवते नमः शिरसे स्वाहा’—इसका उच्चारण करके दाहिने हाथकी सभी अंगुलियोंसे सिरका स्पर्श करे। ‘ॐ वासुदेवाय नमः शिखायै वषट्’—इसके द्वारा दाहिने हाथसे शिखाका स्पर्श करे। ‘ॐ नमो नमः कवचाय हुम्’—इसको पढ़कर दायें हाथकी अंगुलियोंसे बायें कंधेका और बायें हाथकी अंगुलियोंसे दायें कंधेका स्पर्श करे। ‘ॐ भगवते नमः नेत्रत्रयाय वौषट्’—इसको पढ़कर दाहिने हाथकी अंगुलियोंके अग्रभागसे दोनों नेत्रोंका तथा ललाटके मध्यभागमें गुप्तरूपसे स्थित तृतीय नेत्र (ज्ञानचक्षु)-का स्पर्श करे। ‘ॐ वासुदेवाय नमः अस्त्राय फट्’—इसका उच्चारण करके दाहिने हाथको सिरके ऊपरसे उलटा अर्थात् बायीं ओरसे पीछेकी ओर ले जाकर दाहिनी ओरसे आगेकी ओर ले जाये और तर्जनी तथा मध्यमा अंगुलियोंसे बायें हाथकी हथेलीपर ताली बजाये।

अंगन्यासमें आये हुए ‘स्वाहा’, ‘वषट्’, ‘हुम्’, ‘वौषट्’ और ‘फट्’—ये पाँच शब्द देवताओंके उद्देश्यसे किये जानेवाले हवनसे सम्बन्ध रखनेवाले हैं। यहाँ इनका आत्मशुद्धिके लिये ही उच्चारण किया जाता है।

ध्यान

इस प्रकार न्यास करके बाहर-भीतरसे शुद्ध हो मनको सब ओरसे हटाकर एकाग्रभावसे भगवान्का ध्यान करे—

किरीटकेयूरमहार्हनिष्कै-
र्मण्युत्तमालङ्कृतसर्वगात्रम्।
पीताम्बरं काञ्चनचित्रनद्ध-
मालाधरं केशवमभ्युपैमि॥

‘जिनके मस्तकपर किरीट, बाहुओंमें भुजबन्ध और गलेमें बहुमूल्य हार शोभा पा रहे हैं, मणियोंके सुन्दर गहनोंसे सारे अंग सुशोभित हो रहे हैं और शरीरपर पीताम्बर फहरा रहा है—