श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआवाहन और पूजन करके इस प्रकार प्रार्थना करे—
यो मायया विरचितं निजमात्मनीदं
$\quad$खे रूपभेदमिव तत्प्रतिचक्षणाय ।
एतेन धर्मसदने ऋषिमूर्तिनाद्य
$\quad$प्रादुश्चकार पुरुषाय नमः परस्मै ।।
सोऽयं स्थितिव्यतिकरोपशमाय सृष्टान्
$\quad$सत्त्वेन नः सुरगणाननुमेयतत्त्वः ।
दृश्याददभ्रकरुणेन विलोकनेन
$\quad$यच्छ्रीनिकेतममलं क्षिपतारविन्दम् ।।
—‘अनया पूजया भगवन्तौ नरनारायणौ प्रीयेतां न मम ।’
तत्पश्चात् वक्ता और श्रोताओंके सब विकारोंको दूर करनेके लिये वायुदेवताका आवाहन एवं पूजन करे—‘ॐ वायवे सर्वकल्याणकर्त्रे नमः ।’ इस मन्त्रसे पाद्य आदि निवेदन करके निम्नांकित रूपसे प्रार्थना करे—
अन्तः प्रविश्य भूतानि यो विभर्त्यात्मकेतुभिः ।
अन्तर्यामीश्वरः साक्षात् पातु नो यद्वशे स्फुटम् ।।
—‘अनया पूजया सर्वकल्याणकर्ता वायुः प्रीयतां न मम ।’
वायुकी पूजाके पश्चात् गुरुका ‘ॐ गुरवे नमः ।’ इस मन्त्रसे पूजन करके प्रार्थना करे—
ब्रह्मस्थानसरोजमध्यविलसच्छीतांशुपीठस्थितं
स्फूर्जत्सूर्यरुचिं वराभयकरं कर्पूरकुन्दोज्ज्वलम् ।
श्वेतस्रग्वसनानुलेपनयुतं विद्युद्रुचा कान्तया
संश्लिष्टार्धतनुं प्रसन्नवदनं वन्दे गुरुं सादरम् ।।
—‘अनया पूजया गुरुदेवः प्रीयतां न मम।’
तदनन्तर श्वेतपुष्प आदिसे ‘ॐ सरस्वत्यै नमः ।’ इस मन्त्रद्वारा सरस्वतीका पूर्ववत् पूजन करके प्रार्थना करे—
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।
—‘अनया पूजया भगवती सरस्वती प्रीयतां न मम ।’
सरस्वतीपूजनके पश्चात् ‘ॐ शेषाय नमः’, ‘ॐ सनत्कुमाराय नमः’, ‘ॐ सांख्यायनाय नमः,’ ‘ॐ पराशराय नमः’, ‘ॐ बृहस्पतये नमः,’ ‘ॐ मैत्रेयाय