भारतकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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नमः,’ ‘ॐ उद्धवाय नमः’—इन मन्त्रोंसे शेष आदिकी पूजा करके प्रार्थना करे— शेषः सनत्कुमारश्च सांख्यायनपराशरौ।
बृहस्पतिश्च मैत्रेय उद्धवश्चात्र कर्मणि॥
प्रत्यूहवृन्दं सततं हरन्तां पूजिता मया।
—‘अनया पूजया शेषसनत्कुमारसांख्यायनपराशरबृहस्पतिमैत्रेयोद्धवाः प्रीयन्तां न मम।

इसके बाद ‘ॐ त्रय्यारुणये नमः’, ‘ॐ कश्यपाय नमः,’ ‘ॐ रामशिष्याय नमः,’ ‘ॐ अकृतव्रणाय नमः,’ ‘ॐ वैशम्पायनाय नमः’ ‘ॐ हारीताय नमः’—इन मन्त्रोंसे त्रय्यारुणि आदि छः पौराणिकोंकी पूर्ववत् पूजा करके प्रार्थना करे— त्रय्यारुणिः कश्यपश्च रामशिष्योऽकृतव्रणः।
वैशम्पायनहारीतौ षड् वै पौराणिका इमे॥
सुखदाः सन्तु मे नित्यमनया पूजयार्चिताः।
—‘अनया पूजया त्रय्यारुणिप्रभृतयः षट् पौराणिकाः प्रीयन्तां न मम।

तत्पश्चात् ‘ॐ भगवते व्यासाय नमः’ इस मन्त्रसे भगवान् व्यासदेवकी स्थापना और पूजा करके इस प्रकार प्रार्थना करे— नमस्तस्मै भगवते व्यासायामिततेजसे।
पपुर्ज्ञानमयं सौम्या यन्मुखाम्बुरुहासवम्॥
—‘अनया पूजया भगवान् व्यासः प्रीयतां न मम।

इसके बाद सप्ताहयज्ञके उपदेशक भगवान् सूर्यकी स्थापना करके प्रतिदिन उनकी भी पूजा करे। उनकी पूजाका मन्त्र ‘ॐ सूर्याय नमः’ है। पूजनके पश्चात् इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिये।
लोकेश त्वं जगच्चक्षुः सत्कर्म तव भाषितम्।
करोमि तच्च निर्विघ्नं पूर्णमस्तु त्वदर्चनात्॥
—‘अनया पूजया सप्ताहयज्ञोपदेष्टा भगवान् सूर्यः प्रीयतां न मम।

इसके बाद दशावतारोंकी तथा शुकदेवजीकी भी यथास्थान स्थापना करके पूजा करनी चाहिये।

तदनन्तर नारदपीठ और पुस्तकपीठ दोनोंकी एक ही साथ पूजा करे। पहले उन दोनों पीठोंका जलसे अभिषेक करके उनपर चन्दनादिसे अष्टदल कमल बनावे। फिर ‘ॐ आधारशक्तये नमः’, ‘ॐ मूलप्रकृतये नमः’, ‘ॐ क्षीरसमुद्राय नमः’, ‘ॐ श्वेतद्वीपाय नमः,’ ‘ॐ कल्पवृक्षाय नमः,’ ‘ॐ रत्नमण्डपाय नमः,’ ‘ॐ रत्नसिंहासनाय नमः’—इन मन्त्रोंसे दोनों पीठोंमें आधारशक्ति आदिकी भावना करके पूजा करे। फिर चारों दिशाओंमें पूर्वादिके क्रमसे ‘ॐ धर्माय नमः,’ ‘ॐ ज्ञानाय नमः,’