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श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

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पृष्ठ 2093

मित्रके कहे हुए उस उत्तम धर्मानुकूल वचनको स्वीकार करके बलवान् दुरात्मा रावण महलमें लौट गया और वहाँसे फिर अपने सुहृदोंके साथ उसने राजसभामें प्रवेश किया॥ ६८ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें बानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ९२ ॥