भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

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पृष्ठ 2104

थोड़ी ही देरमें भयंकर मुख एवं आकारवाले राक्षस गर्जना करते हुए वहाँ आ पहुँचे। उनके हाथोंमें नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र थे॥ २४ ॥

तलवार, पट्टिश, शूल, गदा, मूसल, हल, तीखी धारवाली शक्ति, बड़े-बड़े कूटमुद्गर, डंडे, भाँतिभाँ तिके चक्र, तीखे फरसे, भिन्दिपाल, शतघ्नी तथा अन्य प्रकारके उत्तमोत्तम अस्त्र-शस्त्रोंसे वे सम्पन्न थे॥

रावणकी आज्ञासे चार सेनापति एक लाखसे कुछ अधिक रथ, तीन लाख हाथी, साठ करोड़ घोड़े, उतने ही गदहे तथा ऊँट और असंख्य पैदल योद्धा लेकर आ पहुँचे। वे सब सैनिक राजाके आदेशसे वहाँ गये॥ २७-२८ ॥

इस प्रकार विशाल सेना लाकर सेनाध्यक्षोंने राक्षसराज रावणके सामने खड़ी कर दी। इसी बीचमें सारथिने एक रथ लाकर उपस्थित कर दिया॥ २९ ॥

उसमें उत्तम दिव्यास्त्र रखे थे, अनेक प्रकारके अलंकारोंसे उस रथको सजाया गया था। उसमें भाँतिभाँ तिके हथियार थे और वह रथ घुँघुरुदार झालरोंसे सुशोभित था॥ ३० ॥

उसमें नाना प्रकारके रन्त जड़े हुए थे। रन्तमय खम्भे उसकी शोभा बढ़ाते थे और सोनेके बने हुए सहस्रों कलशोंसे वह अलंकृत था॥ ३१ ॥

उस रथको देखकर सब राक्षस अत्यन्त आश्चर्यसे चकित हो उठे। उसपर दृष्टि पड़ते ही राक्षसराज रावण सहसा उठकर खड़ा हो गया। वह रथ करोड़ों सूर्योंके समान तेजस्वी तथा प्रज्वलित अग्निके सदृश दीप्तिमान् था। उसमें आठ घोड़े जुते हुए थे। उसपर सारथि बैठा था। वह रथ अपने तेजसे प्रकाशित होता था। रावण तुरंत उस भयंकर रथपर आरूढ़ हो गया॥ ३२-३३ ॥

तदनन्तर बहुत-से राक्षसोंसे घिरा हुआ रावण सहसा युद्धके लिये प्रस्थित हुआ। वह अपने बलकी अधिकतासे पृथ्वीको विदीर्ण-सा करता हुआ जा रहा था॥ ३४ ॥

फिर तो जहाँ-तहाँ सब ओर वाद्योंका महानाद गूँज उठा। मृदङ्ग, पटह, शङ्ख तथा राक्षसोंके कलहकी ध्वनि भी उसमें मिली हुई थी॥ ३५ ॥

‘सीताको चुरानेवाला, दुराचारी, ब्रह्महत्यारा तथा देवताओंके लिये कण्टकरूप राक्षसराज रावण छत्र एवं चँवर लगाये श्रीरघुनाथजीके साथ युद्ध करनेके लिये आ रहा है; इस प्रकारकी कलह-ध्वनि कानोंमें पड़ रही थी॥