श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें अठारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १८ ॥
* यज्ञशालाके पूर्वभागमें यजमान और उसकी पत्नी आदिके ठहरनेके लिये बने हुए गृहको प्राग्वंश कहते हैं। यह घर हविर्गृहके पूर्व ओर होता है। दुष्यन्त, सुरथ, गाधि, गय, राजा पुरूरवा—इन सभी भूपालोंने अपने-अपने राजत्वकालमें रावणके सामने अपनी पराजय स्वीकार कर ली॥ ५ १/२ ॥