भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 249, कुल 2621 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 249

‘जाओ, फिरसे सारी पृथ्वी खोदो और इसे विदीर्ण करके घोड़ेके चोरका पता लगाओ। चोरतक पहुँचकर काम पूरा होनेपर ही लौटना’॥ ११ ॥

अपने महात्मा पिता सगरकी यह आज्ञा शिरोधार्य करके वे साठ हजार राजकुमार रसातलकी ओर बढ़े (और रोषमें भरकर पृथ्वी खोदने लगे)॥ १२ ॥

उस खुदाईके समय ही उन्हें एक पर्वताकार दिग्गज दिखायी दिया, जिसका नाम विरूपाक्ष है। वह इस भूतलको धारण किये हुए था॥ १३ ॥

रघुनन्दन! महान् गजराज विरूपाक्षने पर्वत और वनोंसहित इस सम्पूर्ण पृथ्वीको अपने मस्तकपर धारण कर रखा था॥ १४ ॥

काकुत्स्थ! वह महान् दिग्गज जिस समय थककर विश्रामके लिये अपने मस्तकको इधर-उधर हटाता था, उस समय भूकम्प होने लगता था॥ १५ ॥

श्रीराम! पूर्व दिशाकी रक्षा करनेवाले विशाल गजराज विरूपाक्षकी परिक्रमा करके उसका सम्मान करते हुए वे सगरपुत्र रसातलका भेदन करके आगे बढ़ गये॥ १६ ॥

पूर्व दिशाका भेदन करनेके पश्चात् वे पुनः दक्षिण दिशाकी भूमिको खोदने लगे। दक्षिण दिशामें भी उन्हें एक महान् दिग्गज दिखायी दिया॥ १७ ॥

उसका नाम था महापद्म। महान् पर्वतके समान ऊँचा वह विशालकाय गजराज अपने मस्तकपर पृथ्वीको धारण करता था। उसे देखकर उन राजकुमारोंको बड़ा विस्मय हुआ॥ १८ ॥

महात्मा सगरके वे साठ हजार पुत्र उस दिग्गजकी परिक्रमा करके पश्चिम दिशाकी भूमिका भेदन करने लगे॥ १९ ॥

पश्चिम दिशामें भी उन महाबली सगरपुत्रोंने महान् पर्वताकार दिग्गज सौमनसका दर्शन किया॥ २० ॥

उसकी भी परिक्रमा करके उसका कुशल-समाचार पूछकर वे सभी राजकुमार भूमि खोदते हुए उत्तर दिशामें जा पहुँचे॥ २१ ॥

रघुश्रेष्ठ! उत्तर दिशामें उन्हें हिमके समान श्वेतभद्र नामक दिग्गज दिखायी दिया, जो अपने कल्याणमय शरीरसे इस पृथ्वीको धारण किये हुए था॥ २२ ॥

उसका कुशल-समाचार पूछकर राजा सगरके वे सभी साठ हजार पुत्र उसकी परिक्रमा करनेके पश्चात् भूमि खोदनेके काममें जुट गये॥ २३ ॥

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण · पृष्ठ 249, कुल 2621 में से · BharatKosha