भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

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,, ताम्बूलं समर्पयामि—पान दे।
,, कर्पूरनीराजनं समर्पयामि—आरति करे।
,, छत्रचामरादि समर्पयामि—छत्र-चँवरादि अर्पण करे।
,, पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि—पुष्पाञ्जलि अर्पण करे।
,, प्रदक्षिणामनमस्कारान् समर्पयामि—प्रदक्षिणा और नमस्कार करे।

तत्पश्चात् निम्न प्रकारसे पञ्चोपचारसे श्रीरामायण-ग्रन्थकी पूजा करे—

ॐ सदा श्रवणमात्रेण पापिनां सद्गतिप्रदे।
शुभे रामकथे तुभ्यं गन्धमद्य समर्पये॥
इति गन्धं समर्पयामि।

ॐ बालादिसप्तकाण्डेन सर्वलोकसुखप्रद।
रामायण महोदार पुष्पं तेऽद्य समर्पये॥
इति पुष्पाणि पुष्पमालां च समर्पयामि।

ॐ यस्यैकश्लोकपाठस्य फलं सर्वफलाधिकम्।
तस्मै रामायणायद्य दशाङ्गं धूपमर्पये॥
इति धूपमाघ्रापयामि।

ॐ यस्य लोके प्रणेतारो वाल्मीक्यादिमहर्षयः।
तस्मै रामचरित्राय घृतदीपं समर्पये॥
इति दीपं दर्शयामि।

ॐ श्रूयते ब्रह्मणो लोके शतकोटिप्रविस्तरम्।
रूपं रामायणस्यास्य तस्मै नैवेद्यमर्पये॥
इति नैवेद्यं समर्पयामि।

पूजा करनेके बाद कर्पूरकी आरती करके चार बार प्रदक्षिणा कर पुष्पाञ्जलि अर्पण करे। फिर साष्टाङ्ग प्रणाम कर इस प्रकार नमस्कार करे—

वाल्मीकिगिरिसम्भूता रामसागरगामिनी।