शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 117
भूङ्गराशतक
वन के वृक्षों की छाया में विश्राम करतो हुई विरहिणी स्त्री, अपने नाजुक शरीर की रक्षा के लिये, अपना आँचल हाथ में उठा, उससे चन्द्रमा की किरणों को रोकती हुई वन में जा रही है। यह स्त्री पर-पुरुषता अभिसारिका-नायिका है। अपने यार से मिलने जा रही है। यह इतनी नाजुक है, कि चन्द्रमा की शीतल किरणों को भी बरदास्त नहीं कर सकती।
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Popular Press—Calcutta.