भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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(४) स्त्रियोंका मद्द कैसे उतारा जाता है अथवा उनके मद्द-भञ्जन करनेके क्या उपाय ह। वे कैसे द्रवित की जा सकती हैं।

(५) रुटी हुई स्त्री किस तरह मनानी चाहिये ; यानी मानिनीके मान मोचनके क्या तरीक़े हैं।

(६) जिसके सन्तान नहीं होती या हो-होकर मर जाती है, उसके औलाद् कैसे हो सकती है।

(७) सती या पतिव्रता स्त्रियोंके क्या लक्षण हैं, अर्थात् पतिव्रताओंकी क्या पहचान है।

(८) पुंश्चली या व्यभिचारिणी स्त्रियोंके क्या लक्षण हैं, और उन दुष्टाओंकी कुत्सेष्टाओंसे पुरुष अपनी रक्षा कैसे कर सकता है।

(९) अति संभोग प्रभृतिसे बलहीन हुआ शरीर फिरसे कैसे बलवान हो सकता है, फिरसे नयी जवानी कैसे आ सकती है वगैरः वगैरः।

(१०) गर्भ धारण करनेके क्या उपाय हैं और सुवेद्य गर्भ न रहनेके कारणोंको कैसे जान सकते हैं इत्यादि।

जो पुरुष इन अवश्यमेव जाननेयोग्य विषयोंको नहीं जानते, उन्हें स्त्री-संभोगका सुख कैसे मिल सकता है ?

सारे कामशास्त्रका निचोड़ नीचेके दो श्लोकोंमें है और उसी एक बातके लिए “काम शास्त्र” जैसा बड़ा ग्रन्थ रचा गया है :—