भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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दोहा ।

प्रणय-मधुर आलस भरे, सरस सनेह समेत ।

मृगनैन के ये वचन, हरत चित्तकों लेत ॥३०॥

सार—सुनयनाओंकी मधुर-मधुर बातोंमें जादूकी सी शक्ति होती है । उनकी अमृत-भरी बातों पर कामी पुरुष लहू हो जाते हैं ।

30. Ladies with beautiful eyes always attract the mind by their unrestrained conversation which is sweet because of softness, full of love, very pleasing to the ear on account of delicacy, gives rise to joy, is naturally soothing and confiding and which arouses passions.

—*—

आवासः कियतां गंगे पापहारिणि वारिणि ।

स्तनमभ्ये तरुणया वा मनोहारिणि हारिणि ॥३१॥

या तो पाप-ताप नाशनी गंगाके किनारों पर ही बसना चाहिये, या मनोहर हार पड़ने हुए तरुणी स्त्रियोंके स्तनोंके मध्यमें ही बसना चाहिये ॥३१॥

खुलासा—दो में से एक काम करना चाहिये—या तो पाप-हारिणी गङ्गाके किनारे बैठकर शंकरका भजन करना चाहिये या मोतियोंके हार धारण करनेवाली हृदयहारिणी कामिनियोंके कठोर कुच सेवन करने चाहिये ।

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