भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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कामोद्दीपन करनेवाले वचन, यदि स्वच्छन्दतापूर्वक एकान्तमें कहे जायें, तो, निश्चय ही, सुननेवालेके मनको हर लेते हैं ॥३०॥

खुलासा—कुटुम्बनयनी तर्षणियोंकी प्रेम-रस से पगी हुई मधुर-मधुर बातें रसिक पुरुषोंके कानोंमें अमृत सा ढालती है। मुभायें हुए पुष्प-रूपी प्राणोंको खिलाती है, सारी इन्द्रियोंको प्रसन्न करती और मनमें रसायनका काम करती है। लेकिन जब वे एकान्त-स्थलमें स्वच्छन्दतापूर्वक कही जाती हैं, तब तो और भी गूजब करती हैं। जिनसे ये कही जाती हैं, वे बात कहने-वाल्त्रियोंके कीत-दास ही हो जाते हैं।

कोई प्रेमी अपनी प्रेमिकाकी मीठी-मीठी बातें सुनकर महाकवि अकबरके शब्दोंमें कहता है—

बनोगे खुसरवे इकलीमें दिल, शीरीजँबाँ होकर ।

जहाँगीरी करेगी यह अदा, नूरजहाँ होकर ॥

मीठी-मीठी बातें करनेसे तुम संसारके सभी लोगोंके दिलोंकी रानी हो जाओगी। तुम्हारा यह गुण—मधुर भाषण नूरजहाँकी तरह सारे संसारको फतह करेगा।

them. Ignorance, or inattention on this subject, is sin, and injurious consequences of such a course make out a case of gradual suicide. चिकित्सा-शास्त्र और काम-शास्त्र पढ़ना हरेक मनुष्यका धर्म है। जो इन्हें नहीं पढ़ते वे पाप करते हैं और अन्तमें आत्महत्या आदि करके वे मौत मरते हैं।