शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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29. It is only when both the man and the woman are of the same mind that the sexual pleasures are the greatest. If their minds are diverted, then the intercourse is like that of inanimate bodies.
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प्रणयमधुराः प्रेमोद्गाढा रसादलसास्तथा
भण्डितिमधुरा मुग्धप्रायाः प्रकाशितसंमदाः ॥
प्रकृतिमुग्धा विश्वम्भाहोः स्मरोदयदायिनो
रहसि किमपि स्वैरालापा हरन्ति मृगीदशाम् ॥ २० ॥
मृगनयनी कामिनियोंके प्रणय-प्रीतिसे मधुर, प्रेम-रससे पगे, कामकी अधिकतासे मन्दे, सुननेमें आनन्दप्रद, प्रायः अस्पष्ट और समझमें न आने योग्य, सहज-सुन्दर, विश्वासयोग्य और
बर्बाद करते हैं। आजकलके दगाबाज़ विज्ञापनबाज़ोंकी रंगीन बातोंमें आकर बी० पो० पर बी० पी० भँगाते और पीछे पुरुषोंको कामकी न पाकर रोते और पछुवाते हैं। हमारे भोले-भाले पाठक “सचित्र कोकयास्त्र”का विज्ञापन पढ़ते ही आडर दे देते हैं। पर इतना नहीं समझते, कि आसनोंको तन्नों देकर कोकको कौन छापनेकी हिम्मत कर सकता है ? जैससे किते भय नहीं है ? इसलिये हम फिर कहते हैं कि, आप चाहीस रुपये खर्च करके “चिकित्सा-चन्द्रोदय” सात भाग और “स्वास्थ्य रत्ना” देखें—आपको सम्पूर्ण आयुर्वेद और कामयास्त्रका ज्ञान हो जायगा। इस शास्त्रको पढ़ना आपका कर्तव्य है, धर्म है, यही हमारे मुनियोंको और यही पाश्चात्य विद्वानोंको राय है। देखिये डॉक्टर गन साहब कहते हैं—It is, therefore, every individual's duty to study the laws of his being, and to conform to