भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( १३१ )

योंके कठोर कुचों का सेवन करना—ये दो ही काम जगत्में मुख्य हैं । विचारवान विचारकर, इनमें से किसी एक को चुन लें ।

31. Let one take rest either on the bank of the river Ganges whose water clears away the sin or between the breasts of a woman which are very attracting and where the breast-chain is lying.

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प्रियपुरतो युवतीनां तावत्पद्मातनोतु ह्दि मानः ।

भवति न यावच्चन्दनतत्पुरभिर्भुसुनिर्मलः पवनः ॥३२॥

मानिनी कामिनीयोंके हृदयोंमें अपने प्यारोंके प्रति मान तभीतक ठहरता है, जबतक चन्दनके वृक्षोंकी सुगन्धसे पूर्ण मलयाचलका वायु नहीं चलता ॥३२॥

खुलासा—मानिनीके मनमें उसी समय तक मान रहता है, और उसी समय तक उसकी भुकुटियाँ टेढ़ी रहती हैं, जब तक कि चन्दनके वृक्षोंकी सुगन्धसे मिला हुआ वायु उनके कोमल शरीरोंमें नहीं लगता ।

आमकी मनोहर मञ्जरियाँ, सुविमल चन्द्रमा, कोकिल, भौर और मलय-पवन तथा वसन्त—ये सब कामदेवके साथी और उसके अस्त्र-शस्त्र हैं । वह इन्हींसे त्रिलोकीको वशमें करता है ।

मानिनी कैसी ही कठोर क्यों न हो, किसी तरह मनाने न मनती हो ; तोभी वह कोयलके कुहुकने, मलयपवनके चलने या