शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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शृङ्गारशतक
शत्रुराज वसन्त कोकिल के मधुर-मधुर भङ्कार और भलय पवन से विरही स्त्री-पुरुषों के प्राणान्तर करता है। इस चित्र में यह दिखलाया गया है कि, कामिनी का पति घर में नहीं है, विदेश में है। उधर से वसन्त की श्रवाई होगई है, वृत्तों में नये-नये पत्र आ गये हैं, कोकिलकुंडक नहीं है ; अतः विरह-वेदना से व्याकुल कामिनी मन मलीन किये गई है।
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