शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १४२ )
delight in bright moon-light, whose time is passed in company with birds, but to others whose beloved ones are away, these nights give pain.
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पान्थस्वीविरहानलाहुतिकथामातन्वती मञ्जरी माकन्देषु पिकांगनाभिरधुना सोत्कण्टमालोक्यते ॥ अध्येते नवपाटलापरिमलभ्रमभारपाटचरा वान्तिक्कान्तिवितानतानवकृताः श्रीखण्डशैलानिलाः ॥३६॥
इस वसन्तमें, जगह-जगह, बटोहियोंकी विरहव्याकुल स्त्रियोंकी विरहाग्निमें आहुतिका काम करनेवाली आमकी मञ्जरियाँ खिल रही हैं। कोकिला उन्हें बड़ी अभिलाष या उत्कंठासे देख रही है। नये पलाशके फूलोंकी सुगन्धको चुरानेवाले और राहकी थकानको मिटानेवाले मलय वायु चल रहे हैं ॥२६॥
यहाँ मृत्युराजकी स्वाभाविक महिमाका चित्र खींचा गया है।
ॐ श्रीखण्डशैल मलयपाचल पर्वतका ही दूसरा नाम है। मलयपाचल भारतको सात मुख्य पर्वत-श्रेणियोंमेंसे एक है। संभवतः, यह वाटोंका दक्षिणीय भाग है, जो मंसूरके दक्षिणसे शुरू होकर ट्रावनकोरकी पूर्वी सीमा बनाता है। कीलहानों साहब कहते हैं, मलयपाचल उस पर्वत-श्रेणीका नाम है जो भारतीय प्रायद्वीपके पश्चिमीय तट पर है, और जहाँ चन्द्रनके वृक्ष बहुतायतसे लगते हैं।