शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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पास आराम करना, कोकिलाओंके मधुर शब्द सुनना, प्रफुल्लित लतामयडपके नीचे टहलना, सुन्दरे कवियोंसे बातचीत करना और चन्द्रमाकी शीतल चाँदनीकी बहार देखना—ऐसी सामग्रीसे चैत्र मासकी विचित्र रात्रियाँ किसी-किसी ही भाग्यवान्के नेत्र और हृदयोंको सुखी करती हैं ॥३५॥
खुलासा—कोयल कुहुकती हो, छताएँ फूल रही हों, चाँदनी छिटक रही हो, श्रेष्ठ कवि अपनी रसीली कविताएँ सुनाते हों और भोग-विलाससे थक कर अपनी प्राणप्यारीके पास आराम कर रहे हों—चैतके महोनेकी रातोंमें, जिन्हें ये सब मयस्सर हों, वे निश्चय ही भाग्यवान हैं। जिन्होंने पूर्वजन्ममें पुण्य सञ्चय किये हैं, उन्हें ही ये स्वर्गीय सुख मिलते हैं; सब किसीको नहीं।
दोहा।
कोकिल-रव फूली लता, चैत चाँदनी रैन।
प्रिया सहित निज महलमें, सुकती करत सुचैन ॥३५॥
सार—चैतकी चाँदनी रातमें, विरले पुण्यात्मा ही अपने महलकी छतपर, अपनी प्राणप्यारीके साथ आनन्द करते हैं।
35 These wonderful nights of the month of Chaitra give pleasure to the mind and eyes of a man who enjoys the sweet company of his beloved wife being tired with pleasurable copulation, hears the sweet songs of the cuckoo and takes