भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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delight in bright moon-light, whose time is passed in company with bards, but to others whose beloved ones are away, these nights give pain.

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पान्थस्त्रीविरहानलाहुतिकथामातन्वती मञ्जरी माकन्देषु पिकांगनाभिरधुना सोत्कण्टमालोक्यते ॥ अग्न्येते नवपाटलापरिमलप्रभारपाटचरा वान्तिष्कान्तिवितानतानवक्रताः श्रीखण्डशैलानिलाः ॥३६॥

इस बसन्तमें, जगह-जगह, बटोहियोंकी विरहव्याकुल स्त्रियोंकी विरहाग्निमें आहुतिका काम करनेवाली आमकी मञ्जरियाँ खिल रही हैं। कोकिला उन्हें बड़ी अभिलाष या उत्कंठासे देख रही है। नये पलाशके फूलोंकी सुगन्धको चुरानेवाले और राहकी थकानको मिटानेवाले मलय वायु चल रहे हैं ॥२९॥

यहाँ ऋतुराजकी स्वाभाविक महिमाका चित्र खींचा गया है।

ॐ श्रीखण्डशैल मलयचल पर्वतका ही दूसरा नाम है। मलयचल भारतको सात मुख्य पर्वत-श्रेणियोंमेंसे एक है। संभवतः यह घाटोंका दक्षिणीय भाग है, जो मैसूरके दक्खनसे शुरू होकर द्रावनकोरकी पूर्वी सीमा बनाता है। कीलडार्न साहब कहते हैं, मलयचल उस पर्वत-श्रेणीका नाम है जो भारतीय प्रायद्वीपके पश्चिमीय तट पर है, और जहाँ चन्द्रनके वृक्ष बहुतायतसे लगते हैं।