भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 192, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 192

भूङ्गराशतक

सावन माहों की अंधेरो रात में—मेघों को भयङ्कर गरजना, पत्थर सहित, जल की वृष्टि होना और सुवर्णवत बिजली का चमकना—सुन्दरी सुनयनाओं के लिये राह में सुख और दुःख दोनों का कारण होता है। इस चित्र में यह दिखाया है, कि भयङ्कर रात में सुन्दरी अपने यार से मिलने जा रही है। जब वह यार से मिलने का ख्याल करती है, तब सुखी होती है; किन्तु वर्षा और अन्धकार से दुखी होती है।

Popula* Press—Calcutta.

(पृ० १०६)

शृंगार शतक · पृष्ठ 192, कुल 544 में से · BharatKosha