शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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pungent smell of Ketki flowers there, the roaring of clouds on this side and the dancing of peacocks on the other ?
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असूचीसंपारे नमसि नमसि प्रोद्गजलद्- ध्वनिभासे तस्मिन् पतति दृषदा नीरनिचये ॥ इदं सौदाभिन्याः कनककमनीयं विलसितम् । सुदं च म्लानि च प्रथयति पथिष्वेव सुदृशाम् ॥४५॥
सावनकी घोर अँधेरी रातमें—जबकि हाथको हाथ नहीं सुभूक्ता—मेघोंकी भयंकर गर्जना, पत्थर सहित जलकी दृष्टि होना और सोनेके समान बिजलीका चमकना—सुन्दरी सुनयनाओंके लिये, राह में ही, सुख और दुःख दोनोंका कारण होता है ॥४५॥
खुलासा—सावनके महीनेमें, वर्षा सब दिनोंसे अधिक होती है। रात ऐसी अँधेयारी होती है कि हाथको हाथ नहीं सुभूक्ता। बादल बड़े जोरोंसे गरजते हैं। बिजली भस्माभस्म चमकती है और ऊपरसे पत्थर-मिली जल वृष्टि होती है। उस समय राहकी पगडण्डियाँ दिखाई नहीं देतीं। उस वक्त जो स्त्री अकेली अपने पति या प्यारके पास जाती है, उसे निश्चय ही भयानक कष्ट और भय होता है। इस घोर कष्टके समय भी जब उसे बिजली की सहायतासे कभी-कभी पगडण्डी दीख जाती है, तब प्रियतम से शीघ्र ही मिलनेकी आशा से वह प्रसन्न भी होती है।