शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 20, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( ६ )
फिर शीघ्र ही वृद्ध कर लेती है ; कभी चलती-चलती राहमें उहर कर, अपने पैरका जेवर बिछुआ प्रभुति ठीक करने लगती है। कभी कहती हैं—“तुम उस स्त्रीके यहाँ क्यों गये ? मैं तुमसे न बोलूँगी।” पुरुष बोलना चाहता है तो कहती हैं—“वहीं जाओ, मुझसे क्या काम है ? वह बड़ी सुन्दरी है, मैं उसके मुकाबलेमें किस कामकी हूँ ?” इत्यादि। पुरुष यदि चूमना चाहता है, तो एक अजीब आन-बान और अदाके साथ उसके मुँहके पाससे अपना मुँह हटा लेती है। अगर वह स्तनों पर हाथ डालता है, तो एक अजीब अदासे उसके हाथको भटक देती है, जिससे बुरा भी न मालूम हो और पुरुष उल्टा मर मिटे। अगर पुरुष किसी दूसरीके यहाँ चढ़ा जाता है या उससे और कोई अपराध हो जाता है, तो भट आँखोंमें आँसू भर लाती है। उन आँसूओंमें कामियोंको जो मज़ा आता है,* उसे लिखकर बता नहीं सकते। बातें करतो हैं, तो निहायत मीठी-मीठी और ऐसी रस-चुली कि, पुरुष उनकी बातों पर ही कुर्बान हो जाता है। कहाँ तक लिखें, स्त्रियोंमें जवानीके समय अनन्त हाव-भाव आप ही पैदा हो जाते हैं। ये उन्हें कोई सिखाने नहीं जाता। जेवर-स्त्रियोंके रूपको हजार गुणा बढ़ा देते हैं, तो नखरे उसे लाख गुणा बढ़ा देते हैं।
- Beauty's tears are lovelier than her smiles :—Campbell. चन्द्री के आँसू उसकी मुसक्यान की अपेक्षा प्यारे लगते हैं।