भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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removing their upper garments, causing the hair stand on end, slowly shaking the body by touch and giving pain to the lips by their continuous shivering sounds.

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असारः सन्त्वेते विरतिविरसायासविषया ।

गुण्यन्तां यद्वा ननु सकलदोषास्पदमिति ॥

तथाप्यन्तस्तत्त्वे प्रणिहितविद्यामप्यतिबल—

स्तदीयोऽन्नाख्येयः स्फुरतिहृदयेकोऽपिमहिमा ॥५१॥

“सांसारिक विषय-भोग असार, विरतिमें विश्व करनेवाले और सब दोषोंकी खान हैं”—इत्यादि निन्दा लोग भले ही करें ; फिर भी इनकी महिमा अपार है और इनके शक्तिशाली होनेमें कोई सन्देह नहीं , क्योंकि ब्रह्मविचारमें लीन तत्त्ववेत्ताओंके हृदयमें भी ये प्रकाशित होते हैं ॥५१॥

खुलासा—यद्यपि संसारी विषय-भोग असार और शोथे हैं, हमारे वैराग्य या संसार-त्यागमें बाधक हैं, सभी दोषोंके मूल कारण हैं, जीवका सब तरहसे अनहित करते हैं, मनुष्यको निर्लज्ज और मति-हीन करते एवं ज्ञानको धो बहाते हैं। इतने दोष होने पर भी, कहना पड़ता है कि, ये बड़े ही शक्तिशाली और अपार महिमावान् हैं। इनकी शक्ति और सामर्थ्यका वर्णन करना अत्यन्त कठिन है। क्योंकि जिन्होंने संसार त्याग दिया है, जो दिवारात मूलकारणकी खोजमें लगे रहते हैं, उन