शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
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श्रद्धाशक्त
यदि जगत् में कामिनी न होती, तो महादेव के बाहन नन्दी के कन्या रगड़ने के वृक्षों और गंगाजल से पवित्र हुई शिलाओं वाले हिमालयके स्थान छोड़ कर, कौन मनस्वी पुरप लोगों के सामने जा, उन्हें सिर-भुका, अपने मान को मलिन करता ? (पृ० १६०)
Popular Press—Calcutta.