भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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श्रृङ्गारशतक

दुस्कारे पोर मुख पर जो तिल शोभायमान है, उसे मैं अणाम करता हूँ ; क्योंकि मुझे ऐसा जान पड़ता है, मानो चन्द्रमाको विद्यकर शालग्राम सो रहे हों । पृष्ठ २३९