भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 294, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 294

श्रीमान्

रबी जन्म तक आर्यों के मानने रहती है, अस्सल मी मायूस होती है : आर्यों की छोट होने ही शिव ने भी अधिक दुखहायिनी हो जाती है। इन चित्रमें ऊपर पुरन कोंक मानने देटा हुआ नृत्य-मुद्रा पान कर रहा है, किन्तु नीचे जराडे में दुर्गा है यही भाव कियेया है।

[ पृष्ठ १८८ ]

Digitized by srujanika@gmail.com