शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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फ़राग़त से दुनियामें दम भर न बैठो।
अगर चाहते हो फ़राग़त ज़ियादा ॥
है जानके साथ काम इन्हींके लिये।
बनती नहीं जिन्दगीमें बेकाम किये ॥
जीते हो तो कुछ कीजिये जिन्दों की तरह।
मुर्दों की तरह जिये, तो क्या खाक जिये ॥
अगर आप चाहते हैं कि हम आरामसे रहें, तो दम-भर भी ख़ाली मत बैठो—क्षणभर भी बेकार मत रहो।
आदमीकी जानके साथ काम लगा हुआ है। जिन्दगीमें बिना काम किये काम नहीं चलता।
जीते हो तो जिन्दोंकी तरह काम भी करो। मुर्दोंकी तरह जीनेसे क्या फ़ायदा ?
मैं अपनी बीबीकी पाण्डित्य-पूर्ण बातें सुनकर दंग हो गया। आज मुझे मालूम हुआ कि, मेरी पत्नी कोरी रूपवती ही नहीं—पूण विदुषी और गुणवती है। ऐसी सुलक्षण स्त्री पानेसे मैं अपने तईं भाग्यवान् समझने लगा। हाँ, इतना ज़रूर हुआ कि, पुराने नौकरोंके विदा करते समय, मेरे दिलमें एक तरहकी वेदना हुई, पर धोरे-धोरे इन बातोंको भूल गया। फिर भी, उनमेंसे यदि किसको मैं कष्ट पाते देखता, तो अपने यहाँसे खानेको आटा दाल वगैरः दिलवा दिया करता, क्योंकि मेरे यहाँ इन चीज़ोंकी कमी नहीं थी।